दिल्ली के मध्य रिज में नहीं होना चाहिए कोई निर्माण कार्य, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया कि मालचा महल के चारों ओर चारदीवारी बनाने सहित कोई भी निर्माण कार्य राष्ट्रीय राजधानी के मध्य रिज वन क्षेत्र में नहीं किया जाए। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने तुगलक काल के स्मारक के चारों ओर चारदीवारी का निर्माण करने के अलावा शौचालय बनाए जाने के बारे में मीडिया में आई एक खबर पर संज्ञान लेते हुए कहा कि मध्य रिज में कंक्रीट का ढांचा नहीं बनाया जा सकता है।न्यायाधीश ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार से एक विस्तृत हलफनामा मांगा है। पीठ ने आदेश दिया कि फिलहाल यह निर्देश दिया जाता है कि अभी मध्य रिज में कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाए। राष्ट्रीय राजधानी का फेफड़ा कहे जाने वाला रिज दिल्ली में अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार है और यह पथरीला तथा वन क्षेत्र है। इसे प्रशासनिक कारणों से चार हिस्सों दक्षिण, दक्षिण-मध्य, मध्य और उत्तर में बांटा गया है।चारों क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल करीब 7,784 हेक्टेयर है। दिल्ली सरकार के वकील ने दलील दी कि मालचा महल एक संरक्षित स्मारक है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत नहीं आता है। इसलिए इसके चारों ओर दीवार बनाने का प्रस्ताव है। उच्च न्यायालय ने यह उल्लेख किया कि मध्य रिज एक संरक्षित क्षेत्र है, जो न केवल साफ हवा का स्रोत है वरन लू, राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी आंधी और शुष्क गर्म हवा के खिलाफ अवरोधक का भी काम करता है।पीठ ने कहा कि स्मारक का संरक्षण जरूरी है, लेकिन उस तरीके से नहीं किया जा सकता, जो प्रस्तावित है। पीठ ने कहा कि मुद्दे पर विचार किए जाने की जरूरत है। फिलहाल, पीठ का मानना है कि मध्य रिज में क्रंकीट का ढांचा नहीं बनाया जा सकता। इस विषय पर अगली सुनवाई नौ अक्तूबर को होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *