बरेली नगर निगम में बड़ा खेल! जिस पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप उसे ही सौंप दी मामले की जांच

बरेली नगर निगम में अलाव की लकड़ी खरीद और उसके भुगतान से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सीएम पोर्टल पर भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद जांच के आदेश हुए। जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे निगम प्रशासन ने उसी को जांच सौंप दी।शिकायतकर्ता का कहना है कि अधिकारी ने गलत रिपोर्ट लगाकर मामले का फर्जी निस्तारण दिखा दिया।कुर्मांचल नगर के अमित कुमार अग्रवाल महावीर कंस्ट्रक्शन एंड जनरल ऑर्डर सप्लायर फर्म के ऑनर हैं। उनका आरोप है कि 2023-24 के लिए 40- 40 कुंतल लकड़ी की आपूर्ति का वर्कऑर्डर विभाग ने जारी किया था। लकड़ी की सप्लाई 14, 15 जनवरी तक कर दी गई लेकिन अत्यधिक सर्दी पड़ने के कारण अधिशासी अभियंता डीके शुक्ला उसी रात 10 बजे अपनी टीम के साथ मेरी टाल पर आए और मुझसे कहा था कि आपूर्ति चालू रखो जितनी अतिरिक्त लकड़ी जाएगी उसका भुगतान सप्लाई पूर्ण होनेके बाद कोटेशन बनाकर कर दूंगा।3 फरवरी तक लकड़ी की सप्लाई की गई। उसके बाद एई, जेई द्वारा वर्क ऑर्डर वाली लकड़ी का बिल और अतिरिक्त लकड़ी की कुटेशन बनाकर अधिशासी अभियंता के सामने रख दी थी। उधर, नगरायुक्त निधि गुप्ता वत्स ने कहा कि मामला निर्माण विभाग था इसलिए जांच कराकर रिपोर्ट मांगी गई थी। मुख्य अभियंता से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद ही रिपोर्ट आगे भेजी जाएगी।

गलत रिपोर्ट लगा निस्तारण
अमित ने बताया कि आईजीआरएस पर जो शिकायत पत्र भेजा उसमें लिखा है कि अधिशासी अभियंता द्वारा मुझे बुलाया गया और कहा की तुम्हारी कोटेशन की फाइल बहुत अधिक है। अगर मैं चाहूं तभी तुम्हारा भुगतान हो सकता है। मैं अभी कोर्ट से स्टे लाया हूं, इसमे काफी खर्चा हो गया है। अमित ने कहा कि जब हमने ध्यान नहीं दिया तो कोटेशन की फाइल रोक दी। वर्क ऑर्डर फाइल पर आपति लगाकर भुगतान रोक दिया। नगरायुक्त व मुख्य अभियंता से शिकायत की पर कार्रवाई नहीं हुई। 27 जून 2024 को पोर्टल पर शिकायत की। वहां से जांच के आदेश हुए तो जाच उन्हीं अधिशासी अभियंता को दी गई, जो खुद आरोपी थे। उन्होंने जाच की गलत रिपोर्ट लगा शिकायत का निस्तारण कर दिया।

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