
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सख्त लहजों में चेतावनी दी कि अगर वह शासन पर ध्यान देने के बजाय विपक्षी दलों और नेताओं को निशाना बनाना जारी रखते हैं तो वो दिन दूर नहीं जब वो “अलग-थलग” हो जाएंगे।
दरअसल, बजट 2024 जारी होने के बाद से विपक्षी दल और नेता भाजपा सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं। मंगलवार को कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भाजपा या उनके गठबंधन साथियों की सरकारें नहीं हैं, उन राज्यों की उपेक्षा की गई है। इस एवज में कांग्रेस ने नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किया है। कांग्रेस के साथ स्टालिन भी ऐसा ऐलान कर चुके हैं।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पार्टी के चीफ और तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने नरेंद्र मोदी सरकार पर उनके राज्य की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों ने भाजपा के 400 पार के सपने को चकनाचूर कर दिया है, इसलिए अब ये राज्य उनकी उपेक्षा झेल रहे हैं। स्टालिन ने आगे कहा, “चुनाव खत्म हो गया है… अब हमें देश के बारे में सोचना है। बजट 2024 आपकी हुकूमत बचा लेगा… लेकिन देश नहीं बचाएगा। निष्पक्ष होकर सरकार चलाइए… वरना अलग-थलग पड़ जाओगे।”
तमिल नेता ने एक्स पर कहा, “उन लोगों के प्रति अब भी प्रतिशोध मत रखिए जिन्होंने आपको हराया… यदि आप अपनी राजनीतिक पसंद और नापसंद के अनुसार शासन करेंगे तो आप अलग-थलग पड़ जाएंगे।”
बजट को लेकर विवाद
मोदी सरकार 3.0 का पहला पूर्ण बजट मंगलवार को संसद में पेश किया गया। इस बजट को लेकर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया आई है। ऐसा दावा किया है कि बजट में गैर भाजपा शासित राज्यों की अनदेखी की गई है। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने कहा है कि चेन्नई मेट्रो रेल के दूसरे चरण और कोयम्बटूर में इसी तरह के विकास जैसे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। डीएमके ने कहा है कि चेन्नई और दक्षिणी जिलों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्स्थापन के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया। राज्य ने 37,000 करोड़ रुपये मांगे थे लेकिन अभी तक केवल 276 करोड़ रुपये ही मिले हैं ।
नीति आयोग का बहिष्कार
गैर-बीजेपी राज्यों की नाखुशी शनिवार को होने वाली नीति आयोग की बैठक में चार विपक्षी मुख्यमंत्रियों के न आने से उजागर हुई है। स्टालिन के अलावा, इस सूची में तीन कांग्रेस शासित नेता शामिल हैं – सिद्धारमैया (कर्नाटक), रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), और सुखविंदर सुखू (हिमाचल प्रदेश)।