केस दर्ज हुए 5906 और गिरफ्तारी सिर्फ 513, ED के पिक एंड चूज पॉलिसी पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कथित शराब घोटाला मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, ”हम इस तथ्य से अवगत हैं कि अरविंद केजरीवाल निर्वाचित नेता हैं।” पीठ ने यह भी कहा कि केजरीवाल 90 दिनों से अधिक समय से कारावास में हैं लेकिन यह निर्णय केजरीवाल को करना है कि वह मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे या नहीं।

इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) गिरफ्तार करने की शक्ति का प्रयोग करते समय उन सामग्रियों को नजरअंदाज नहीं कर सकता जो आरोपी को दोषमुक्त करती हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने के मामले में ईडी पिक एंड चूज पॉलिसी नहीं अपना सकती है। कोर्ट ने कहा, “किसी अधिकारी को गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को फंसाने वाली सामग्री को चुनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्हें गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को दोषमुक्त और दोषमुक्त करने वाली अन्य सामग्रियों पर भी समान रूप से विचार करना होगा।” कोर्ट ने कहा कि PMLA की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार करने की शक्ति का प्रयोग अधिकारी की मर्जी और पसंद के अनुसार नहीं किया जा सकता है।

कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ईडी दर्ज मामलों में चुनिंदा आधार पर जांच और अन्य कार्यवाही कर रही है। अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने वाले फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी को एकरूपता बनाए रखनी चाहिए। इसके अलावा उसका आचरण भी सुसंगत और एकरूप होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सभी के लिए एक ही नियम के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से जुड़े डेटा पर भी कई सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि मामलों को निपटाने के लिए ईडी के पास कोई एक समान नीति है या नहीं?

लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने ये भी पूछा कि कब किसकी गिरफ्तारी होगी, इस पर भी कोई स्पष्ट और एक समान नीति है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि ईडी 5906 ECIR में से सिर्फ 513 व्यक्तियों को ही गिरफ्तार कर सकी है और मात्र 1142 मामलों में ही शिकायतें दर्ज की जा सकी हैं। बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े किसी भी केस में ईडी ECIR (Enforcement Case Information Report) दर्ज करती है। यानी प्रवर्तन मामलों की सूचना रिपोर्ट कर्ज करती है। इसमें आरोप और आरोपी से जुड़ी सूचनाएं होती हैं। यह FIR से अलग होती है। इसके बाद मामले की जांच और आरोपी की गिरफ्तारी होती है।

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