सुलतानपुर जिले के इसौली सीट से पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू और उनके एक सहयोगी ने सोमवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। जहां से उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया। पूर्व विधायक और उनके सहयोगी पर जबरन दीवार गिरवाने और घर में घुसकर मारपीट करने का आरोप था।बता दें कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सोनू सिंह ने अखिलेश यादव से मिलकर सपा का दामन थाम लिया था।शासकीय अधिवक्ता वैभव पांडेय ने बताया कि चंद्रभद्र सिंह उनके समर्थक सूर्य प्रकाश सिंह और रुखसार अहमद के खिलाफ 25 फरवरी 2021 को धनपतगंज क्षेत्र के रहने वाले बनारसी नामक व्यक्ति के परिसर की एक दीवार जबरन ध्वस्त करवाने और मना करने पर घर में घुसकर मारपीट करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश योगेश यादव ने पिछले साल छह जुलाई को चंद्रभद्र सिंह समेत तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए डेढ़-डेढ़ साल के कारावास और कुल 23 हजार 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सत्र अदालत में अपील की गयी थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था।वैभव पांडेय ने बताया कि विशेष न्यायाधीश एकता वर्मा ने अपील खारिज करते हुए पूर्व विधायक समेत तीनों दोषियों को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट की अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था। इसी आदेश के क्रम में तीनों दोषियों को संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होना था मगर वे हाजिर नहीं हो रहे थे, जिसके चलते उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।उन्होंने बताया कि मामले में तीसरे सजायाफ्ता रुखसार अहमद ने पिछले चार जून को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह और सूर्य प्रकाश ने उसी दिन एक अर्जी देकर खराब स्वास्थ्य के कारण हाजिर नहीं हो पाने की बात कहते हुए अदालत से समय मांगा था, लेकिन अदालत ने इससे इनकार कर दिया था और गैर जमानती वारंट जारी करते हुए आत्मसमर्पण के लिये 10 जून तक की मोहलत दी थी। वैभव पांडेय ने बताया कि इस पर चंद्रभद्र और सूर्य प्रकाश ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है।सोनू सिंह का राजनीतिक करियरसुलतानपुर की राजनीति में दो नाम काफी चर्चित रहे हैं। यशभद्र सिंह उर्फ मोनू सिंह और चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह। दोनों भाइयों का इलाके में दबदबा है। मोनू सिंह ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। बाहुबली और पूर्व विधायक सोनू सिंह ने साल 2002 में सपा से अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत की थी। हालांकि 2009 में उन्होंने बसपा जॉइन कर ली। लेकिन 2012 में जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह पीस पार्टी में शामिल होकर उसी के सिंबल से चुनाव लड़ा। साल 2014 में जब वरुण गांधी सुलतानपुर से प्रत्याशी बने तो सोनू ने भाजपा में शामिल हो गए। सोनू ने 2019 में वरुण गांधी का साथ छोड़ बसपा में शामिल हो गए। मायावती ने उन्हें सुलतानपुर से टिकट दिया। सोनू सिंह भाजपा की मेनका गांधी से महज 14 हजार वोटों से हार गए। 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच सोनू से ने एक बार फिर पाला बदलते हुए सपा में शामिल हो गए। अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात के बाद सुलतानपुर का सियासी पारा हाई हो गया।बाहुबली और पूर्व विधायक सोनू सिंह ने कोर्ट में किया सरेंडर, लोकसभा चुनावों के बीच सपा में हुए थे शामिल
सुलतानपुर जिले के इसौली सीट से पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू और उनके एक सहयोगी ने सोमवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। जहां से उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया। पूर्व विधायक और उनके सहयोगी पर जबरन दीवार गिरवाने और घर में घुसकर मारपीट करने का आरोप था।बता दें कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सोनू सिंह ने अखिलेश यादव से मिलकर सपा का दामन थाम लिया था।शासकीय अधिवक्ता वैभव पांडेय ने बताया कि चंद्रभद्र सिंह उनके समर्थक सूर्य प्रकाश सिंह और रुखसार अहमद के खिलाफ 25 फरवरी 2021 को धनपतगंज क्षेत्र के रहने वाले बनारसी नामक व्यक्ति के परिसर की एक दीवार जबरन ध्वस्त करवाने और मना करने पर घर में घुसकर मारपीट करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश योगेश यादव ने पिछले साल छह जुलाई को चंद्रभद्र सिंह समेत तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए डेढ़-डेढ़ साल के कारावास और कुल 23 हजार 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सत्र अदालत में अपील की गयी थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था।वैभव पांडेय ने बताया कि विशेष न्यायाधीश एकता वर्मा ने अपील खारिज करते हुए पूर्व विधायक समेत तीनों दोषियों को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट की अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था। इसी आदेश के क्रम में तीनों दोषियों को संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होना था मगर वे हाजिर नहीं हो रहे थे, जिसके चलते उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।उन्होंने बताया कि मामले में तीसरे सजायाफ्ता रुखसार अहमद ने पिछले चार जून को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह और सूर्य प्रकाश ने उसी दिन एक अर्जी देकर खराब स्वास्थ्य के कारण हाजिर नहीं हो पाने की बात कहते हुए अदालत से समय मांगा था, लेकिन अदालत ने इससे इनकार कर दिया था और गैर जमानती वारंट जारी करते हुए आत्मसमर्पण के लिये 10 जून तक की मोहलत दी थी। वैभव पांडेय ने बताया कि इस पर चंद्रभद्र और सूर्य प्रकाश ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है।सोनू सिंह का राजनीतिक करियरसुलतानपुर की राजनीति में दो नाम काफी चर्चित रहे हैं। यशभद्र सिंह उर्फ मोनू सिंह और चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह। दोनों भाइयों का इलाके में दबदबा है। मोनू सिंह ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। बाहुबली और पूर्व विधायक सोनू सिंह ने साल 2002 में सपा से अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत की थी। हालांकि 2009 में उन्होंने बसपा जॉइन कर ली। लेकिन 2012 में जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह पीस पार्टी में शामिल होकर उसी के सिंबल से चुनाव लड़ा। साल 2014 में जब वरुण गांधी सुलतानपुर से प्रत्याशी बने तो सोनू ने भाजपा में शामिल हो गए। सोनू ने 2019 में वरुण गांधी का साथ छोड़ बसपा में शामिल हो गए। मायावती ने उन्हें सुलतानपुर से टिकट दिया। सोनू सिंह भाजपा की मेनका गांधी से महज 14 हजार वोटों से हार गए। 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच सोनू से ने एक बार फिर पाला बदलते हुए सपा में शामिल हो गए। अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात के बाद सुलतानपुर का सियासी पारा हाई हो गया।