850 फीट ऊंची पहाड़ी पर बसे हैं बाबा तिलेश्वरनाथ, पत्थर पर पत्थर रखने से पूरी होती है मन्नत

सासाराम जिले के डेहरी प्रखंड के भड़कुड़िया गांव स्थित गोड़इला पहाड़ी पर बाबा तिलेश्वर नाथ वर्षों से विराजमान हैं। 850 फीट की ऊंचाई होने के बाद भी बाबा के दर्शन को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

यहां पहुंच कर श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं।

मन्नतें पूरी होने पर घंटा बांधते हैं श्रद्धालु
बाबा के दरबार में हाजिरी लगा कर जाने के बाद मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने दोबारा पहुंचते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं की ओर से बाबा के दरबार में घंटा बांधा जाता है। बाबा के दरबार में बंधे छोटे-बड़े हजारों घंटे देख कर ही मन्नतें पूरी होने का विश्वास श्रद्धालुओं को हो जाता है।

पत्थर पर पत्थर रखने की भी है परंपरा
बाबा के दर्शन के बाद श्रद्धालु बाबा के दरबार में पत्थर पर पत्थर रखते हैं। मान्यता है कि पत्थर पर पत्थर रख मन्नतें मांगने पर बाबा के आशीर्वाद से मन्नतें पूरी हो जाती है। श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने के बाद बाबा के दरबार में पत्थर पर पत्थर रखते हैं। पत्थर रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना होता है। पत्थर रखने के बाद मन्नतें मांगी जाती है। फिर वैसे ही श्रद्धालु वापस चले जाते हैं। मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर जाकर बाबा के दर्शन करने के साथ घंटा बांधते हैं।

महाशिवरात्रि पर उमड़ता है जनसैलाब
बाबा तिलेश्वर नाथ का मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। इस मंदिर में अति प्राचिन शिवलिंग अवस्थित है्, जिसका दर्शन करने श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही मनोकामनाएं पूरी होती है। महा शिवरात्रि के मौके पर लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। 850 फीट की ऊंची पहाड़ी पर बाबा का मंदिर स्थत होने के बाद भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। बुजुर्ग श्रद्धालु भी बड़े आसानी से पहाड़ी पर चढ़ जाते हैं। उन्हें थकावट का जरा एहसास तक नहीं होता। श्रद्धालुओं की आस्था चढ़ाई और थकावट पर भारी पड़ती है।

सावन में भी पहुचंते हैं श्रद्धालु
सावन के मौके पर भी यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। जलाभिषेक, रूद्राभिषेक के साथ बेल पत्र व धतुरे को भी शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। हर हर महादेव के जयकारे से पूरा वातावरण गुंजमान हो उठता है।

ताड़का भी आती थी पूजा करने
स्थानीय ग्रामीणों का कहना कि पूर्वज ताड़का को यहां आकर बाबा के पूजा अर्चना करने की कहानी सुनाते हैं, जिससे मंदिर की प्राचीनता के बारे में पता चलता है।

भस्मासुर के डर से पहाड़ पर पहुंचे थे
भस्मासुर ने तपस्या कर भोलेनाथ से भस्म करने का आशीर्वाद प्राप्त किया था। किदवंति है कि भस्मासुर के डर से बाबा गोड़ईला स्थिल पहाड़ पर पहुंचे थे, जब भस्मासुर को बाबा का वहां छुपने का पता चला। तब भस्मासुर वहां भी पहुंच गया। भस्मासुर के डर से बाबा तकिया स्थित तिलेश्वर नाथ स्थान पहुंचे थे, उसके बाद बाबा गुप्तेश्वर नाथ गुफा में छुप गए थे।

स्थानीय ग्रामीणो ने बनाई सीढ़ी
बाबा के दर्शन करने में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। इसे देखते हुए भड़कुड़िया गांव के ग्रामीणों ने पहाड़ी को काट कर 118 सीढ़ी बनाई है। सीढ़ी बन जाने से बुजुर्ग श्रद्धालुओं को भी बाबा के दर्शन सुलभ हो गए। वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने मंदिर के आस पर पानी की व्यवस्था के साथ अन्य व्यवस्था की जाती है।

प्रशासन का नहीं मिलता है सहयोग
मंदिर के विकास को लेकर प्रशासन का सहयोग नहीं मिलने का भी आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शशि कपुर पाल ने बताया कि मंदिर कमेटी को भी निर्माण कराने पर वन विभाग की ओर से रोक लगा दी जाती है। वहीं प्रशासन भी मंदिर के विकास को लेकर कोई कदम नहीं उठाती है। मंदिर के साथ आसपास के क्षेत्र का विकास होने से पर्यटन की संभावना बढ़ेगी।

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