
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को क्यों हटाया? यह ऐसा सवाल है जो सियासी गलियारे में खासतौर पर बसपा काडर के लिए हैरानी का सबब बना हुआ है। राजनीति के जानकार इसे मायावती की सधी हुई सियासी चाल तो करार दे ही रहे हैं, उनका मानना है कि आकाश का बढ़ता कद, परिवारवाद के आरोप और विपक्ष या यूं कहें भाजपा पर ज्यादा हमलावर होना ही उन पर कार्रवाई का असली सबब बना।
परिवारवाद के आरोपों से बचने को उठाया कदम
मायावती ने आकाश आनंद पर कार्रवाई कर अपने काडर को नया संदेश दिया है। दरअसल, मायावती हमेशा कहती रही हैं कि बसपा काडर आधारित पार्टी है और बहुजन हित उनका सर्वोपरि मिशन है। साथ ही वह विपक्षी दलों पर परिवारवाद को लेकर भी हमलावर रही हैं। पार्टी के पुराने निष्ठावान इसे मायावती का बसपा में परिवारवाद न पनपने देने और इसे लेकर विरोधी दलों के आरोपों से बचने की कवायद मान रहे हैं। दरअसल, वह ऐसा कर अपने काडर को संदेश देना चाहती हैं कि पार्टी कांशीराम और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों पर ही चल रही है न कि अन्य दलों जैसी परिवार को बढ़ाने की मंशा पर।
भाजपा पर कड़ुवे बोल बने हटने का सबब
कभी बसपा में कोआर्डिनेटर रहे अब भाजपा नेता गंगाराम आंबेडकर कहते हैं: ‘मायावती बहुजन समाज के दबाब में यह फैसला करने पर मजबूर हुई हैं। करीब छह वर्ष पहले मायावती ने बुलंदशहर के रहने वाले जाटव समाज के जय प्रकाश सिंह को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के विदेशी होने पर तीखी प्रतिकूल टिप्पणी कर दी थी। इसके चलते मायावती ने जय प्रकाश को अगले ही दिन सभी पदों से हटा दिया था। आकाश द्वारा लगातार भाजपा सरकार पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के चलते सोशल मीडिया पर बहुजन समाज सवाल उठा रहा था कि क्या मायावती अब भतीजे को भी हटाएंगी। इसी आरोपों से बचने के लिए उन्होंने यह फैसला किया है।’
आकाश का बढ़ता कद माया की छवि पर आंच
मायावती अक्सर सत्ता की चाभी अपने हाथ में रखने की बात करती रही हैं। साथ ही मीडिया के सामने वह अपनी शर्तों पर बोलती हैं। आकाश लगातार राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे रहे थे। इससे उनकी छवि निखर रही थी। इसे लेकर भी बसपा नेतृत्व नाराज़ था। पूर्व आईजी अरुण कुमार गुप्ता कहते हैं: ‘आकाश के चलते काडर सक्रिय हो रहा था। उनके सुशिक्षित होने का भी बहुजन समाज के युवाओं पर असर पड़ना लाजिमी था। ऐसे में बसपा नेतृत्व को यह भय सताना लाजिमी है कि क्या आकाश का बढ़ता कद मायावती की छवि पर छाया डाल सकता है?
इसमें कोई संदेह नहीं कि मायावती आकाश आनंद को फिर उत्ताधिकारी बना दें लेकिन फिलवक्त बहुजन समाज में यह सवाल तो उठ ही रहा था कि आकाश ही पार्टी के सर्वेसर्वा हो गए हैं? इस आशंका पर पूर्ण विराम लगे इसीलिए बसपा को यह फैसला करना पड़ा। वर्ष 2022 में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर भी टीएमसी के पुराने नेताओं में कुछ इसी तरह की आशंकाओं ने जन्म लिया था। नतीजतन, अभिषेक बनर्जी को भी ममता ने महासचिव पद से हटा दिया था।