गिरफ्तारियों के बारे में बताया, निज्जर कांड का सबूत तो कुछ नहीं दिया; भारत की कनाडा को दो टूक

खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन भारतीय नागरिकों को लेकर कनाडा ने भारत को जानकारी दी है। हालांकि भारत ने कहा है कि उसे कनाडा की ओर इस संबंध में कोई औपचारिक संदेश नहीं मिला है।बता दें कि कनाडा पुलिस ने निज्जर की हत्या के आरोप में एडमॉन्टन में रहने वाले भारतीय नागरिकों 22 वर्षीय करण बराड़, 22 वर्षीय कमलप्रीत सिंह और 28 वर्षीय करणप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया गया है। शुक्रवार को उन पर हत्या व हत्या की साजिश रचने को लेकर आरोप लगाए गए।इस संबंध में भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “कनाडा ने हमें गिरफ्तारी की जानकारी दी है। लेकिन हमें कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है।” इसके अलावा, प्रवक्ता ने कहा कि कनाडा ने इस मामले में कोई विशिष्ट या प्रासंगिक सबूत या जानकारी नहीं दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “तीन भारतीयों को निज्जर के मामले में हिरासत में लिया गया है। हम लोगों को भी बताया गया है इसके बारे में। हालांकि इसके बारे में कोई औपचारिक या राजनायिक कम्युनिकेशन हमारे पास नहीं आया है। लेकिन हमको बताया गया है कि इन तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।

कनाडा में गिरफ्तार भारतीयों को काउंसलर एक्सेस के सवाल पर उन्होंने कहा, “अलग-अलग देशों में अलग-अलग कानून होता है। जैसे कुछ देशों में प्रावधान है कि अगर जिसको हिरासत में लिया गया है वह खुद काउंसलर एक्सेस न मांगे तो वहां की सरकार हमसे संपर्क नहीं करती है। ये स्वत: संज्ञान का मामला भी नहीं होता है कि अगर आपने किसी देश के नागरिक को हिरासत में लिया है तो आपको अपने आप काउंसलर एक्सेस देना ही होगा।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि गिरफ्तारी की जानकारी के अलावा, कनाडा ने आज की तारीख में हमसे कोई सबूत शेयर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने बार-बार इस बात को उजागर किया है कि हिंसा फैलाने वाले, उग्रवादियों और अलगाववादियों को कनाडा में पनाह दी जाती है।

जयसवाल ने यह भी कहा कि भारत ने कनाडा से कई प्रत्यर्पण अनुरोध किए हैं लेकिन अभी तक उन पर अमल नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने माना कि दोनों देश इन सभी मामलों पर राजनयिक स्तर पर चर्चा कर रहे हैं। इससे पहले कनाडा में भारत के उच्चायुक्त संजय वर्मा ने भी 7 मई को मॉन्ट्रियल काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि दोनों देश चिंता के मुद्दों का समाधान खोजने के लिए राजनयिक चैनलों का उपयोग कर रहे हैं। वर्मा ने यह भी कहा कि कनाडा से उत्पन्न होने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे और कनाडाई नागरिकों की खालिस्तान समर्थक गतिविधियां भारत के लिए “दो लाल रेखाएं” हैं।एक दिन पहले निज्जर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन भारतीय नागरिक पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कनाडा की एक अदालत में पेश हुए। इस हत्याकांड से कनाडा-भारत के संबंधों में तनाव पैदा हो गया है। ‘वैंकूवर सन’ अखबार ने बताया कि सुरे की खचाखच भरी प्रांतीय अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए तीनों को अलग-अलग पेश किया गया। वे अपने वकीलों से सलाह-मशविरा करने के लिए वक्त दिए जाने की वजह से 21 मई तक मुकदमे की सुनवाई स्थगित करने पर सहमत हुए। माना जाता है कि ये तीनों लॉरेंस बिश्वनोई गिरोह से जुड़े हैं। खबर में कहा गया है कि वे ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में सुरे प्रांतीय अदालत में पेश हुए।कनाडाई नागरिक निज्जर (45) की 18 जून, 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सुरे में एक गुरुद्वारे के बाहर हत्या कर दी गई थी। स्थानीय पुलिस के अनुसार, कथित हत्यारे पिछले पांच वर्षों में कनाडा आए थे और उन पर मादक पदार्थों की तस्करी और हिंसा में संलिप्त होने का संदेह है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा अपने देश में खालिस्तानी तत्वों से संबंधित कुछ टिप्पणियां करने के कुछ दिनों बाद, भारत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि ये टिप्पणियां एक बार फिर कनाडा में अलगाववाद, उग्रवाद और हिंसा को मिले राजनीतिक स्थान को दर्शाती हैं। भारत ने ट्रूडो के आरोपों को ‘बेतुका’ और ‘‘प्रेरित’’ बताते हुए खारिज कर दिया था। कनाडा में सिख अलगाववादी समूहों की मौजूदगी पर भारत लंबे समय से आपत्ति जताता रहा है। उसने निज्जर को ‘‘आतंकवादी’’ घोषित किया था।

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