तीसरे चरण में भी कम वोटिंग… मतलब

लोकसभा चुनाव के तीन चरणों के लिए वोटिंग हो चुकी है। 93 लोकसभा सीटों के लिए तीसरे चरण के मतदान में 64.5% वोटिंग हुई। यह 2019 के लोकसभा चुनाव में हुए 66% वोटिंग से कुछ कम है। पहले दो चरणों की तरह, तीसरे दौर में भी 2019 की तुलना में कम मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया हालांकि अंतर काफी कम हो गया है। पहले चरण में 66.14 प्रतिशत और दूसरे चरण में 66.71 प्रतिशत मतदान हुआ था। तीनों चरणों में यूपी और बिहार में मतदान प्रतिशत सबसे कम रहा। खास बात है कि चुनाव आयोग की तरफ से किए गए कई प्रयासों के बावजूद कम वोटिंग प्रतिशत चिंता का विषय है। हालांकि, तीसरे चरण में छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गोवा में मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई। अब सवाल उठता है कि कम वोटिंग प्रतिशत के सत्ताधारी बीजेपी नीत एनडीए और कांग्रेस के लिए क्या मायने हैं। लोग कम वोटिंग प्रतिशत को बीजेपी के लिए झटका बता रहे हैं। हालांकि, अभी चार चरण की वोटिंग बची हुई है। अभी भी घटनाओं और आश्चर्यों की गुंजाइश है जो चुनाव का रुख बदल सकते हैं। संभावना का संतुलन बीजेपी के पक्ष में झुका हुआ है, लेकिन शायद उतनी मजबूती से नहीं जितनी उन्हें उम्मीद होगी। 2019 के पिछले लोकसभा चुनाव में, बीजेपी ने 303 सीटें जीतीं। वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों ने लगभग 50 सीटें जीतीं। इस साल का चुनाव शुरू होने से पहले इसका बीजेपी का नारा था “अब की बार, 400 पार। मतदाताओं के लिहाज से देखें तो कम मतदान प्रतिशत अच्छी खबर नहीं है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि लोकसभा चुनाव को लेकर वोटरों में कुछ उदासीनता है। अगर हम 2019 के लोकसभा चुनावों से तुलना करें, तो उदासीनता साफ दिखाई देती है। कम मतदान से किसे चुनावी फायदा होगा और किसको घाटा, वास्तव में इसका कोई हिसाब नहीं होता है। कई बार मतदान प्रतिशत गिरता है फिर भी सरकार जीत कर केंद्र में वापसी करती हैं। कई बार मतदान प्रतिशत कम होने से सरकारों को हार का भी सामना करना पड़ता है।पिछले दो आम चुनावों में मोदी से परास्त होने के बाद, विपक्षी दलों को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। कांग्रेस पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी के चुनाव प्रचार अभियान की भाषा और शैली में बदलाव से घबराहट की भावना झलकती है। कांग्रेस लगातार यह संदेश दे रही है कि अगर इस बार केंद्र में मोदी सरकार आई तो उनकी वास्तविक मंशा संविधान को बदलना तथा आरक्षण खत्म करना है। कांग्रेस लगातार यह कह रही है कि यही वजह है कि उनकी पार्टी के नेता लोकसभा चुनाव में जनता से ‘400 से अधिक’ सीट जिताने के लिए कह रहे हैं।

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