नहीं मान रहे मुइज्जू-जिनपिंग, फिर मालदीव पहुंचा चीन का जासूसी जहाज; भारत के लिए कैसे खतरा

मालदीव में चीन समर्थक राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी के संसदीय चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज करने के बाद माले और बीजिंग में दोस्ती और गहरी होने लगी है। भारत से दुश्मनी कर चीन की गोद में खेल रहे मालदीव में चीनी रिसर्च जहाज जियांग यांग होंग 03 वापस लौट आया है।यह वही जहाज है जो पहले भी चीन से मालदीव पहुंचा था और इसको लेकर भारत ने चिंता भी व्यक्त की थी। इस पोत पर जासूसी जहाज होने का आरोप लगता रहा है और इसी वजह से भारत, अमेरिका जैसे देशों के लिए यह जहाज टेंशन की तरह है।मालदीव के मीडिया हाउस अधाधू की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी जासूस जहाज को मालदीव के थिलाफुशी औद्योगिक द्वीप के बंदरगाह पर खड़ा किया गया है। मुइज्जू सरकार ने जहाज की वापसी की वजह का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अपनी यात्रा से पहले जहाज को डॉक करने की अनुमति की पुष्टि की। मालदीव के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सीमा के पास लगभग एक महीना बिताने के बाद जहाज पहली बार 22 फरवरी को पहुंचा था। लगभग छह दिन बाद रवाना होने के बाद जहाज वापस ईईजेड सीमा में चला गया था। चीनी जासूसी जहाज अब ईईजेड को पार करने के बाद वापस मालदीव आ गया है।

फरवरी में मालदीव के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीनी जहाज ने अपने चालक दल के रोटेशन के लिए मालदीव का दौरा किया था। हालांकि, मालदीव के विदेश मंत्रालय ने चीनी जहाज के बारे में दावा किया था कि वह इस दौरान कोई भी रिसर्च नहीं करेगा। चीन के स्टेट ओशनिक एडमिनिस्ट्रेशन (एसओए) जो जियांग यांग होंग 03 का प्रबंधन करता है, के अनुसार, यह चीनी जहाज समुद्री अनुसंधान के लिए देश में निर्मित सबसे आधुनिक जहाज है। चीन का दावा है कि यह एक व्यापक अनुसंधान जहाज है। चीन के अनुसार, नाव की सहनशक्ति 15,000 समुद्री मील है, जिसका अर्थ है कि यह बिना किसी सहायता के अपने काम के लिए 15,000 समुद्री मील की यात्रा बिना रुके कर सकता है।
मालदीव के रक्षा मंत्री ने संसद में दिया था बयान
इससे पहले चीनी जहाज को लेकर मालदीव के रक्षा मंत्री घासन मौमून ने संसद को बताया था कि चीनी पोत मालदीव के जलक्षेत्र के अंदर और निकट नौकायन के बावजूद कोई शोध नहीं करेगा। उन्होंने मार्च महीने में कहा था, ”मालदीव क्षेत्र में कोई शोध करने की अनुमति नहीं दी गई थी। माले में डॉकिंग और खाना खरीदने के बाद, उन्होंने चालक दल में बदलाव किया। जो लोग हवाई जहाज से आए थे वे नाव पर सवार हो गए और जो नाव पर थे वे हवाई जहाज से चले गए। इसी की अनुमति दी गई थी।”
पहले भी मालदीव पहुंच चुका है जासूसी जहाज
चीनी जहाज इससे पहले फरवरी में मालदीव पहुंचा था, जिससे नई दिल्ली और माले के बीच तनाव बढ़ गया था। भारत ने इस पोत को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं और श्रीलंका से इस पोत को अपने पोर्ट पर रुकने की अनुमति देने से इनकार करने के लिए कहा था। जनवरी में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने चीन का दौरा किया था और फिर उसके तुरंत बाद यह जहाज चीन से निकल गया था। इससे भी भारत का संदेह बढ़ गया था। बाद में यह 22 फरवरी को मालदीव की राजधानी माले पहुंचा था। इस दौरान जहाज का रडार सिस्टम भी बंद कर दिया गया था। बाद में अमेरिका ने भी जहाज के जासूसी जहाज होने का दावा किया था और वहां के थिंक टैंक ने कहा था कि यह कोई रिसर्च नहीं कर रहा, बल्कि पनडुब्बियों से संबंधित आंकड़े जुटा रहा है।

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