भारत की मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा यह देश, आम लोगों की जेब हो सकती है ढीली

टमाटर की कीमतें भले ही कम होने लगी हैं, लेकिन आम आदमी को अभी भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. क्योंकि आगामी कुछ दिनों में तुअर दाल की कीमतें और बढ़ सकती हैं.दरअसल, महंगाई से निपटने के लिए भारत आगामी सीजन के लिए अफ्रीकी देशों से तुअर दाल आयात करना चाहता है.लेकिन अफ्रीकी देश मोजाम्बिक न्यूनतम निर्यात मूल्य लगाकर भारत की इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. मोजाम्बिक के तुअर दाल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू होने से दाल की कीमतें और भी महंगी हो सकती हैं.एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल भारत में तुअर दाल की खपत लगभग 45 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल घरेलू उत्पादन सिर्फ 34.3 लाख टन ही था.
मोजाम्बिक ने तुअर के निर्यात पर न्यूनतम मूल्य लगाया
आने वाले दिनों में मोजाम्बिक में नई तुअर फसल की कटाई होने वाली है. ऐसे में घरेलू उत्पादन में कमी को देखते हुए भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मोजाम्बिक के साथ-साथ मलावी, तंजानिया और सूडान से तुअर दाल आयात करना चाहता है. लेकिन इसी बीच मोजाम्बिक ने निर्यात पर न्यूनतम मूल्य लगाने की घोषणा की है.निर्यात पर न्यूनतम मूल्य लागू करने का मतलब है मोजाम्बिक का कोई भी निर्यातक भारत को निर्धारित मूल्य से कम कीमत पर तुअर दाल निर्यात नहीं करेगा. आमतौर पर यह कदम निर्यात को कम करने और विदेशी मुद्रा आय को बढ़ाने के लिए किया जाता है.
200 डॉलर प्रति टन ज्यादा है निर्धारित कीमत

इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के अध्यक्ष बिमल कोठारी ने ‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ से बात करते हुए कहा, ” हमें कल खबर मिली है कि मोजाम्बिक ने अलग-अलग गुणवत्ता की तुअर दाल पर 850-900 डॉलर प्रति टन न्यूनतम निर्यात मूल्य (minimum export price) लगाया है. इसका यह मतलब है कि वे (मोजाम्बिक) भारत में मौजूदा तुअर दाल की कीमतों को देखते हुए न्यूनतम निर्यात मूल्य तय कर रह रहे हैं, जो कि सही नहीं है. क्योंकि वे हमारी स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.”उन्होंने आगे कहा, “मोजाम्बिक में अरहर यानी तुअर दाल की कीमत 600-700 डॉलर प्रति टन है. वहीं, मुंबई में अफ्रीकी अरहर की कीमत लगभग 92 रुपये प्रति किलोग्राम है. ऐसे में हमने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह मोजाम्बिक को भारत की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर इस तरह के कदम न उठाने के लिए बात करे.”हाल ही में भारतीय उच्चायोग ने मोजाम्बिक की राजधानी मापुटो में निर्यातकों से कहा था कि भारत मार्च 2024 तक बिना किसी प्रतिबंध के तुअर और उड़द का आयात करेगा.
मोजाम्बिक से 5 लाख टन तुअर दाल आयात होने की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत आगामी सीजन में अफ्रीकी देशों से 7.5 लाख टन से अधिक तुअर दाल आयात करना चाहता है, जिसमें मोजाम्बिक से लगभग 5 लाख टन आयात होने की उम्मीद है. कुछ साल पहले ही मोजाम्बिक ने तुअर के सबसे बड़े निर्यातक देश म्यांमार को पीछे छोड़ दिया है.व्यापार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मोजाम्बिक में जिस तुअर की कीमतें लगभग एक महीने पहले 825 डॉलर प्रति टन के आसपास थी, अब 950 डॉलर पहुंच गई है. आईग्रेन इंडिया के राहुल चौहान ने कहा, “हर कोई जानता है कि भारत को अरहर की जरूरत है. ऐसे में वो भारत की स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कीमतें और भी बढ़ सकती हैं.रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में लेमन किस्म की तुअर की कीमतें 1310 डॉलर प्रति टन है. यह दाल रंग और स्वाद दोनों में अफ्रीकी तुअर से बेहतर होते हैं और भारतीय स्वाद के अनुकूल होते हैं.

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