
मिशन 2024 के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करना बिहार के सीएम नीतीश कुमार के लिए बेहद मुश्किल होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के बीच सीटों को लेकर तालमेल कठिन होता जा रहा है।
केजरीवाल और कांग्रेस की लड़ाई के कारण विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA के लिए दिल्ली और पंजाब गले की हड्डी बन गए हैं। एक तरफ बुधवार को नीतीश कुमार दिल्ली पहुंचे तो दूसरी तरफ कांग्रेस और केजररीवाल की पार्टी आप के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई।
कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर चुनाव लड़ने का संकेत दिया तो आप ने यहां तक पूछ लिया कि मुंबई में होने वाली INDIA की अगली बैठक में उनकी पार्टी क्यों जाएगी। अब नीतीश के लिए सबसे बड़ा टास्क कांग्रेस और केजरीवाल के बीच सीटों का तालमेल कराना ही है।
कहां फंस रहा है पेच
दरअसल में पंजाब और दिल्ली दोनों जगह आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के हाथों से सरकार छीनी है। आप ने एक तरह से दोनों प्रदेशों से कांग्रेस का सफाया कर दिया है। इससे दोनों प्रदेशों में कांग्रेस की स्टेट यूनिट आप के साथ किसी तरह के तालमेल के खिलाफ है। बुधवार को दिल्ली कांग्रेस की लोकसभा चुनाव को लेकर बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में खरगे, राहुल गांधी भी शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा ने कहा कि हमें दिल्ली की सभी सातों सीटों पर संगठन मजबूत करने का संदेश दिया गया है। सात महीने हैं और सात सीटें हैं। कहा गया है कि सभी सातों सीटों पर तैयारी रखनी है।
अलका लांबा के बयान के बाद आप की ओर से भी धमकी भरा बयान आ गया। आप प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा है कि अगर ऐसा है तो हम मुंबई की मीटिंग में क्यों जाएं. पार्टी नेतृत्व फैसला करेगा कि मुंबई जाना है कि नहीं। हालांकि मामला बढ़ता देख दिल्ली कांग्रेस के प्रबारी दीपक बाबरिया ने कहा कि अलका लांबा एक प्रवक्ता हैं लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करने के लिए वह अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं। मैंने प्रभारी के तौर पर कहा है कि आज बैठक में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई। मैं अलका लांबा के बयान का खंडन करता हूं।
प्रभारी के बयान के बाद भले ही कांग्रेस और आप के बीच मामला शांत होता दिखाई दे रहा है लेकिन यह शांति कितने दिनों की है कहा नहीं जा सकता है। अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार कल भी रहेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि वह केजरीवाल, खरगे और राहुल गांधी से मिल सकते हैं।
केजरीवाल की नाराजगी पहले भी सामने आई थी और नीतीश कुमार ही उन्हें मनाकर पटना लाए थे। हालांकि दिल्ली विधेयक पर कांग्रेस की ओर से कोई भरोसा नहीं देने पर संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस से पहले ही केजरीवाल दिल्ली निकल गए थे। इसके बाद एक बार फिर मान मनव्वल चला और बंगलुरु बैठक में भी केजरीवाल पहुंचे थे।
अब जब कांग्रेस और आप के बीच अचानक तनाव पैदा हो गया है तो सवाल यही है कि नीतीश एक बार फिर केजरीवाल को मनाकर मुंबई ले जा पाएंगे। सवाल यह भी है कि क्या नीतीश कुमार कांग्रेस और केजरीवाल के बीच सीटों पर कोई सहमति बना पाएंगे। या फिर राहुल और खरगे अपनी स्टेट यूनिट के दबाव में दिल्ली और पंजाब में आप से सीटों पर तालमेल नहीं करेंगे।