कृष्ण जन्मभूमि के पास तोड़फोड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, यथास्थिति बनाए रखने का दिया आदेश

मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के पीछे के हिस्से में तोड़फोड़ पर यथास्थिति बनाए रखने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है। यहां रेलवे की तरफ से अवैध बस्तियों हटाने का काम चल रहा था।

रेलवे के एक्शन में अभी तक करीब 100 मकान तोड़े गए थे। बुधवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की कार्रवाई पर 10 दिन के लिए रोक लगा दी है, जबकि इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिन के बाद होगी। इस मामले के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया गया है।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता की तरफ से यह अपील की गई थी कि रेलवे ने अतिक्रमण के लिए 100 से अधिक घरों पर बुलडोजर चला दिया है। याचिकाकर्ता की सुप्रीम कोर्ट से मांग थी कि इस कार्रवाई पर रोक लगनी चाहिए। पक्ष को सुनने के बाद तीन जजों की पीठ ने इसपर 10 दिनों का स्टे लगा दिया है। इस मामले पर सात दिन बाद सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। तब सुप्रीम कोर्ट सरकारी पक्ष को सुनेगा।

हाल ही में रेलवे अधिकारियों ने मथुरा स्टेशन के पास श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पीछे रेलवे की जमीन से सैकड़ों अवैध घरों और दुकानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। स्थानीय निवासी याकूब शाह ने योगी आदित्यनाथ की सरकार और रेलवे की पहल को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब तक करीब 100 घर तोड़े जा चुके हैं, लगभग 70 घर बरकरार हैं।

संयोग से, ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट’ नामक एक संगठन ने इस महीने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि मथुरा में कृष्ण मंदिर के पास शाही ईदगाह में ‘हिंदू धर्म के प्रमाण’ हैं। न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति शुधांशु धूलिया की पीठ ने मथुरा में शाही ईदगाह के साथ-साथ वाराणसी में ज्ञानबापी मस्जिद का ‘वैज्ञानिक सर्वेक्षण’ करने को कहा।

शाही ईदगाह मस्जिद मथुरा के प्राचीन कटरा स्तूप (जिसे कटरा केशवदास के नाम से जाना जाता है) क्षेत्र में श्री कृष्ण जन्मस्थान परिसर के निकट है। हिंदुत्व का दावा है कि ईदगाह की उस ज़मीन पर कृष्ण के जन्मस्थान पर एक प्राचीन केशवदास मंदिर था। काशी के ‘मूल विश्वनाथ मंदिर’ की तरह, मथुरा मंदिर को भी मुगल सम्राट औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था। कथित तौर पर, शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण औरंगजेब के आदेश पर 1669 और 1670 के बीच कटरा केशवदास मंदिर की 13.37 एकड़ जमीन पर किया गया था।

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