बिहार विधानसभा चुनाव (2025) में लालू यादव की पार्टी आरजेडी (RJD) की बुरी हार के बाद पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। आरजेडी के कद्दावर नेता, पूर्व सांसद और लालू-राबड़ी की सरकार में मंत्री रहे विजय कृष्ण ने पार्टी छोड़ दी है। वह लालू प्रसाद यादव के करीबी होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भी बेहद पुराने साथी रहे हैं। खास बात यह है कि वह लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार को हरा भी चुके हैं।
सक्रिय राजनीति से अलग होने का लिया फैसला
विजय कृष्ण ने अपना इस्तीफा पत्र लालू प्रसाद यादव को भेजा है। इस पत्र में उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है, बल्कि लिखा है:
“मैंने दलगत राजनीति, सक्रिय-राजनीति से अलग हो जाने का निर्णय लिया है। अत: राष्ट्रीय जनता दल के प्राथमिक सदस्यता एवं सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं। कृपया स्वीकार करें।”
इस्तीफे की जानकारी आज (बुधवार, 10 दिसंबर) सामने आई है। जेल से बाहर आने के बाद भी विजय कृष्ण आरजेडी से जुड़े हुए थे।
कौन हैं विजय कृष्ण?
विजय कृष्ण बिहार की राजनीति के उन नेताओं में शामिल हैं जो लालू और नीतीश कुमार की तरह ही जेपी आंदोलन से उभरे हुए हैं।
- नीतीश से पुराना रिश्ता: नीतीश कुमार और विजय कृष्ण दोनों का गृह क्षेत्र पुराने परिसीमन के अनुसार बाढ़ लोकसभा था। दोनों नेताओं ने एक साथ खूब राजनीति की है और एक साथ ट्रेन से आना-जाना हुआ करता था। जब नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव से अलग हुए, तो विजय कृष्ण लालू के साथ ही रह गए थे, जिसके बाद दोनों में दूरियां बढ़ गईं।
- नीतीश कुमार को हराया: 2004 के लोकसभा चुनाव में विजय कृष्ण ने बाढ़ सीट से जीत हासिल की थी और नीतीश कुमार को हराया था। 1999 में नीतीश कुमार ने उन्हें हराया था। 2004 में नीतीश कुमार ने बाढ़ के साथ नालंदा से भी चुनाव लड़ा था और नालंदा से जीते थे।
- राजनीतिक करियर: वह 1977 में पहली बार जनता पार्टी (बिहार) के महासचिव बने थे। जनता दल के टिकट पर बाढ़ विधानसभा सीट से 1990 और 1995 में लगातार दो बार विधायक बने और लालू-राबड़ी की सरकार में मंत्री भी रहे।
10 साल जेल में रहे
विजय कृष्ण 2009 के लोकसभा चुनाव के समय जेडीयू में चले गए थे, लेकिन 2010 के विधानसभा चुनाव के समय आरजेडी में वापस लौट आए। 2009 में एक मर्डर केस में वह अपने बेटे के साथ फंस गए और 2013 में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने 2022 में उन्हें रिहा कर दिया। लगभग 10 साल जेल में रहने के बाद भी वह आरजेडी से जुड़े रहे थे।