
संसद पर हमले की बरसी के दिन यहां की सुरक्षा में चूक का गंभीर मामला सामने आया। इस चूक के बाद संसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल है कि संसद हमारे देश की सबसे उच्च सुरक्षा वाली इमारतों में से एक है। इतनी बड़ी सुरक्षा चूक अस्वीकार्य है। विपक्ष की तरफ से नए संसद भवन में सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की मांग की गई है। नई संसद में सुरक्षा में हुई गंभीर चूक को लेकर विपक्ष की तरफ से सवाल खड़े किए जाना वाजिब हैं। विपक्ष का कहना है कि यह घटना नए संसद भवन के उद्घाटन के तीन महीने के भीतर हुआ है। ऐसे विस्तृत जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।वास्तव मे सरकार को यह पता लगाने के लिए सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए कि नया संसद भवन सुरक्षा खतरों से परे है या नहीं।आज सदन के अंदर कुछ भी हो सकता था…जो भी लोग यहां आते हैं – चाहे वे आगंतुक हों या रिपोर्टर, किसी के टैग नहीं हैं…सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। लोकसभा की सुरक्षा में चूक राष्ट्र की संप्रभुता के लिए चुनौती है।आज हुवा यह की लोकसभा में शून्य काल की कार्यवाही के दौरान बुधवार को दर्शक दीर्घा से दो लोग सदन के भीतर कूद गए। दोपहर करीब एक बजे इनमें से एक व्यक्ति मेज को फांदते हुए आगे की ओर भाग रहा था। सुरक्षाकर्मियों और कुछ सांसदों ने उसे घेर लिया। बाद में दोनों को पकड़ लिया गया। पीठासीन सभापति राजेंद्र अग्रवाल ने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कुछ सांसदों का कहना है कि सदन में कूदने वाले व्यक्तियों ने कुछ ऐसे पदार्थ का छिड़काव किया, जिससे गैस फैल गई।संसद की सुरक्षा के लिए कई बलों को तैनात किया गया है। हालांकि, मुख्य तौर पर आईबी, ‘पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप’ (पीडीजी) और दिल्ली पुलिस तैनात रहती है। आईटीबीपी व दूसरे बलों के जवान भी आते जाते रहते हैं। पीडीजी में सीआरपीएफ के अधिकारी व जवान रहते हैं। संसद भवन की ओवरआल सुरक्षा के लिए पीडीजी जिम्मेदार होता है। इस मामले में पुलिस की लापरवाही या इंटेलिजेंस चूक, इस पर रार मच गई है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की जांच के बाद पता चलेगा कि असल कोताही किसकी है। अगर कोई व्यक्ति कैप्सूल लेकर संसद में घुसा है तो उस दौरान गेटों पर कौन से सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। सपा के सांसद राम गोपाल यादव ने एक बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना था कि पहले सदन के बाहर, भीतर और गैलरी के अलावा संसद के चप्पे चप्पे पर सादे कपड़ों में जवान मौजूद रहते थे। उनकी नजर सभी पर रहती थी। अब वह टीम गायब हो गई है।ज्ञात हो की 13 दिसंबर, 2001 को लोकतंत्र के मंदिर को आतंकियों ने निशाना बनाया था। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया था। इस हमले में नौ लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में दिल्ली पुलिस के छह जवान, संसद सुरक्षा सेवा के दो जवान और एक माली शामिल थे। वहीं, हमले को अंजाम देने आए आतंकियों को ढेर कर दिया गया था।