
खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पिछले कुछ समय में भारत के खिलाफ लगातार जहर उगला है। उसने 13 दिसंबर को भारतीय संसद पर हमले की भी धमकी दी है। पन्नू की गीदड़भभकी पर भारत सरकार ने करारा जवाब दिया।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा कि कनाडाई और अमेरिका के अधिकारियों को इस मामले से अवगत कराया गया है। वहीं, पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों की हत्याओं पर बागची ने कहा कि भारत चाहेगा कि जो लोग यहां वांछित हैं, उन्हें हमारी कानूनी व्यवस्था का सामना करना पड़े।
उन्होंने कहा, “जो लोग भारत में आपराधिक और आतंकवादी गतिविधियों के लिए न्याय का सामना करना चाहते हैं, हम चाहेंगे कि वे भारत आएं और हमारी कानूनी प्रणाली का सामना करें, लेकिन मैं पाकिस्तान में हो रहे विकास पर टिप्पणी नहीं कर सकता।” पन्नू ने हाल ही में कथित तौर पर भारत की संसद पर हमला करने की धमकी दी है। इस पर बागची ने कहा कि सरकार इन खतरों को गंभीरता से लेती है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम धमकियों को गंभीरता से लेते हैं। लेकिन हम ऐसे लोगों को बहुत ज्यादा एम्प्लिफाई नहीं करना चाहते, जो धमकियां देते हैं और बहुत अधिक कवरेज प्राप्त करते हैं। हमने इस मामले को अमेरिका और कनाडाई अधिकारियों के साथ उठाया है। चरमपंथियों और आतंकवादियों की प्रवृत्ति किसी मुद्दे पर मीडिया कवरेज चाहने की होती है।” उन्होंने आगे कहा कि वह कानून के उल्लंघन के लिए हमारी एजेंसियों द्वारा वांछित है और एक प्रक्रिया है जिसके तहत हम सहायता मांगते हैं और उन पर मुकदमा चलाया जाता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपराध किया गया है या नहीं।
खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उसे 13 दिसंबर को संसद पर हमले की धमकी देते हुए सुना जा सकता है। उसने कहा था कि कथित तौर पर भारतीय एजेंसियों द्वारा रची गई साजिश उसे खत्म करने में विफल रही और वह दिसंबर में संसद पर हमला करके जवाब देगा। बता दें कि 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हमला हुआ था और इस बार 22वीं बरसी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची ने आगे कहा कि हमारे मामले में, मुझे लगता है कि अनुरोधों के प्रकार का विवरण दिया गया है। भारत में जिन अपराधों के लिए वह जिम्मेदार है…हमने भारत या भारतीय राजनयिकों के खिलाफ चरमपंथियों या आतंकवादियों द्वारा की गई किसी भी धमकी के बारे में अपने साझेदारों को चिंताएं बताई हैं।” वहीं, अफगान दूतावास के मुद्दे पर बागची ने कहा, ”नई दिल्ली में अफगान दूतावास और मुंबई और हैदराबाद में वाणिज्य दूतावास काम कर रहे हैं। आप झंडे से देख सकते हैं कि वे किसका प्रतिनिधित्व करते हैं और संस्थाओं की स्थिति पर हमारी स्थिति नहीं बदली है। हम यहां अफगान नागरिकों को सेवाएं देना जारी रखेंगे।”