UP News: योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी की 11 नदियों में नाव चलाने के लिए Registration होगा अनिवार्य, यात्रियों के बीमा की भी तैयारी

उत्तर प्रदेश में नदियों के जरिए जल परिवहन को सुरक्षित, व्यवस्थित और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए योगी सरकार ने नई पहल की है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली 2026 के तहत नावों के संचालन, पंजीकरण, सुरक्षा मानकों और प्रबंधन को नियमानुसार संचालित किया जाएगा। इस व्यवस्था से न केवल यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने, बल्कि नदी पर्यटन, पर्यावरण के अनुकूल माल ढुलाई और स्थानीय लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने की भी उम्मीद है।

जल परिवहन की निगरानी के लिए बनेगी Inland Water Authority

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश में जल परिवहन की निगरानी के लिए एक ‘इनलैंड वाटर अथॉरिटी’ का गठन किया जाएगा। इस प्राधिकरण के अध्यक्ष परिवहन मंत्री होंगे। इसका उद्देश्य जलयानों के संचालन और उनसे जुड़े प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

नई नियमावली उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियम, 2002 की जगह लेगी। इसे अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें कुल 16 अध्याय रखे गए हैं। पहले 14 अध्याय यांत्रिक रूप से संचालित जलयानों से संबंधित हैं, जबकि 15वां अध्याय गैर-यांत्रिक नावों और 16वां अध्याय दोनों प्रकार के जलयानों के संचालन एवं विनियमन से जुड़े प्रावधानों पर केंद्रित है।

यूपी की 11 प्रमुख नदियों में नावों का Registration जरूरी

प्रस्तावित नियमावली के तहत गंगा, यमुना, सरयू और घाघरा समेत उत्तर प्रदेश की 11 प्रमुख नदियों में चलने वाली नावों और स्टीमर का पंजीकरण अनिवार्य करने की व्यवस्था की गई है। यह नियम यांत्रिक और गैर-यांत्रिक, दोनों तरह की नावों पर लागू होगा।

नावों की यात्री क्षमता के आधार पर पंजीकरण शुल्क तय किया जाएगा। गैर-यांत्रिक नावों के लिए 50 रुपये पंजीकरण शुल्क प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया से नावों की संख्या, उनके संचालकों और संचालन से जुड़ी जानकारी का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।

यात्रियों और नाविकों के Insurance पर भी जोर

जल परिवहन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए यात्रियों और नाविकों के बीमा की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके साथ ही छोटे नाव संचालकों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों का रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इससे नाविकों की पहचान और उनके कामकाज से संबंधित जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

पंजीकरण और निर्धारित सुरक्षा मानकों के जरिए जल परिवहन को अधिक जवाबदेह बनाने का लक्ष्य है। इस व्यवस्था से नावों के संचालन की निगरानी बेहतर होने और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मौजूदा नाव संचालकों को मिलेंगे 90 दिन

नई नियमावली को अधिसूचित करने से पहले भारत सरकार के अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 की धारा 107 के तहत अधिसूचना का पूर्व प्रकाशन कराया जाएगा। नियमावली लागू होने की तारीख से पहले से संचालित सभी जलयानों को नए मानकों के अनुरूप ढालने के लिए 90 दिन का समय दिया जाएगा।

इस अवधि में मौजूदा जलयान संचालकों को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलेगा। सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में जल परिवहन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के साथ नदी पर्यटन तथा स्थानीय परिवहन गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

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