Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में सजेगा अंतरराष्ट्रीय रामलीला मंच, फिलीपींस समेत कई राज्यों की टीमें दिखाएंगी अपनी संस्कृति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में आयोजित होने वाला दसवां दीपोत्सव इस बार सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय रामलीला परंपराओं का खास संगम बनने जा रहा है। छह और सात नवंबर को संस्कृति विभाग की ओर से करीब 10 से 15 मंचों पर रामलीला का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के कलाकार अपनी क्षेत्रीय भाषाओं और पारंपरिक शैलियों में रामकथा प्रस्तुत करेंगे। वहीं, फिलीपींस की टीम की भागीदारी से आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी।

अलग-अलग भाषाओं में सुनाई जाएगी रामकथा

दसवें दीपोत्सव के दौरान केरल, असम और जम्मू-कश्मीर की टीमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में रामलीला का मंचन करेंगी। इनमें मलयालम, असमिया और डोगरी भाषाओं की प्रस्तुतियां शामिल होंगी। इसके अलावा उत्तराखंड और बंगाल की रामलीला परंपराएं भी इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनेंगी।

अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकार अपनी पारंपरिक अभिनय शैलियों के जरिए रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत करेंगे। इससे दर्शकों को भारत की भाषाई विविधता और विभिन्न राज्यों में प्रचलित रामलीला की परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन दिखाएगा कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों में प्रस्तुत होने के बावजूद रामकथा साझा सांस्कृतिक विरासत के रूप में लोगों को जोड़ती है।

ICCR के जरिए विदेशी रामलीला टीमों को न्योता

अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी के अनुसार, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के माध्यम से विदेशी टीमों को आमंत्रित किया गया है। फिलीपींस की टीम की भागीदारी तय हो चुकी है, जबकि अन्य देशों की टीमों को भी आयोजन से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग देशों में प्रचलित रामलीला परंपराओं को एक मंच पर लाना है। इसके जरिए रामायण से जुड़ी वैश्विक सांस्कृतिक विरासत को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा और विभिन्न देशों की कलात्मक परंपराओं को जानने का अवसर मिलेगा।

दीपोत्सव से अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा बढ़ावा

संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न राज्यों और देशों की रामलीला टीमों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।

दीपोत्सव के दौरान अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को अलग-अलग भाषाओं और शैलियों में रामकथा देखने का अवसर मिलेगा। दीपों से जगमगाती नगरी में देशी और विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां इस आयोजन को सांस्कृतिक विविधता, परंपरा और साझा विरासत का विशेष अनुभव बनाएंगी।

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