Delhi High Court: CJP नेताओं की याचिका वापस लेने पर NCP (SP) का बयान, अनीश गावंडे बोले- ‘सिर्फ तिरंगा लहराया था’

दिल्ली हाई कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लेने के मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP (SP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सभी को हाई कोर्ट के आदेश को पढ़ना चाहिए, क्योंकि अदालत ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है। गावंडे ने दोनों नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें तिहाड़ जेल में सात दिन हो चुके हैं और सरकार के पास उन्हें अधिक समय तक जेल में रखने की कोई वजह नहीं है।

अनीश गावंडे ने हिरासत पर उठाए सवाल

अनीश गावंडे ने कहा कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, क्योंकि मजिस्ट्रेट की ओर से अभी कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों को सात दिन से तिहाड़ जेल में रखा गया है।

गावंडे ने कहा, “उन्होंने क्या किया? उन्होंने केवल तिरंगा लहराया था, अगर उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन भी किया है, तो क्या उनको सात दिन के लिए तिहाड़ भेजना सही है? अगर आज का फैसला हमारे खिलाफ जाता है तो हम हाई कोर्ट का रुख करेंगे.”

उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश को समझने के लिए सभी पक्षों को उसका पूरा विवरण पढ़ना चाहिए। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि यदि आगे का फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है, तो वे कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP नेताओं को क्या निर्देश दिया?

सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाने के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। बुधवार, 21 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी हिरासत के मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने दोनों नेताओं से अपनी याचिका वापस लेने को कहा। अदालत ने उन्हें पहले विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष निर्धारित सुनवाई के नतीजे का इंतजार करने और यदि वहां उनकी शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो अपीलीय अदालत का रुख करने का रास्ता बताया।

अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड के कथित उल्लंघन से जुड़े इस मामले में उचित उपाय नहीं है। हाई कोर्ट ने मामले में मजिस्ट्रेट के स्तर पर कार्यवाही पूरी होने से पहले हस्तक्षेप करने से परहेज किया।

13 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए थे सौरव दास और आशुतोष रांका

सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में रद्द किए जाने के बावजूद उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे।

इसके बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 14 अक्टूबर को दोनों नेताओं को पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब मामले में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई निर्धारित है, जिसके फैसले पर आगे की कानूनी कार्रवाई निर्भर करेगी।

CJP नेताओं की हिरासत पर आगे क्या होगा?

दिल्ली हाई कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब मामले की अगली सुनवाई और विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के फैसले पर नजर रहेगी। अनीश गावंडे ने दोनों नेताओं की हिरासत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे दोबारा हाई कोर्ट का रुख करेंगे। वहीं, अदालत ने फिलहाल मजिस्ट्रेट के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने को कहा है।

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