Keshav Maurya का INDIA गठबंधन पर तीखा हमला, बोले- राहुल गांधी PM और अखिलेश-ममता के CM बनने की संभावना शून्य!

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के दलों की ओर से किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्षी दलों पर संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। मौर्य ने यह भी कहा कि भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति कभी पैदा नहीं होगी। उनके मुताबिक, विपक्षी दलों को जनता पहले ही राजनीतिक रूप से पीछे धकेल चुकी है।

2029 लोकसभा चुनाव को लेकर क्या बोले केशव मौर्य?

केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए INDIA गठबंधन की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के जनादेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अगला आम चुनाव वर्ष 2029 में होना है, लेकिन गठबंधन की स्थिति अभी से कमजोर दिखाई दे रही है।

उन्होंने लिखा, “अगला लोकसभा चुनाव 2029 अभी दूर है, लेकिन 2014, 2019 और 2024 के जनादेश को देखते हुए इंडी गठबंधन की हालत अभी से पतली नज़र आ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के प्रति जनता का विश्वास आज हमारी सबसे बड़ी ताक़त बन चुका है.”

उपमुख्यमंत्री ने भाजपा के प्रति जनता के समर्थन को पार्टी की प्रमुख ताकत बताते हुए आगामी चुनावों में भी जीत की उम्मीद जताई।

राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी पर साधा निशाना

केशव मौर्य ने अपने बयान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे का भी जिक्र किया।

उन्होंने लिखा, “भविष्य का जनादेश भी जनता के आशीर्वाद से भाजपा के पक्ष में होगा, यह हमारा दृढ़ विश्वास है. देश और प्रदेशों में भाजपा ही वर्तमान और भाजपा ही भविष्य है, कांग्रेस के सदाबहार अपरिपक्व व अनुभव से शून्य राहुल गांधी का प्रधानमंत्री बनना और अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे नेताओं के फिर से मुख्यमंत्री बनने की संभावना भी शून्य है.”

मौर्य की यह टिप्पणी विपक्षी नेताओं के राजनीतिक भविष्य को लेकर उनकी पार्टी के विश्वास को दर्शाती है। हालांकि, वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों के परिणाम मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेंगे।

‘भारत कभी बांग्लादेश जैसी राजनीतिक अस्थिरता का शिकार नहीं होगा’

केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों पर राष्ट्रहित के विरुद्ध काम करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति पैदा होने की उम्मीद करने वाले दलों को जनता पहले ही जवाब दे चुकी है।

उन्होंने लिखा, “राष्ट्रहित के विरुद्ध संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने का दुस्साहस करना ही जिनका एकमात्र मक़सद है, ऐसे साजिशकर्ताओं को यह समझ लेना चाहिए कि भारत कभी भी बांग्लादेश जैसी ‘राजनीतिक अस्थिरता’ का शिकार नहीं होगा. ऐसे सपने देखने वाले वामपंथियों को जनता पहले ही ‘बंगाल की खाड़ी’ और ‘अरब सागर’ में फेंक चुकी है. बचे-खुचे पहले अपना अस्तित्व बचाएं, फिर सपना देखने की गुस्ताखी करें.”

इस बयान के जरिए मौर्य ने चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध और उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी है।

2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य दोहराया

उपमुख्यमंत्री ने अपने बयान में भारत की आर्थिक और वैश्विक प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि देश विकास के क्षेत्र में कई अन्य देशों से आगे बढ़ेगा और विश्व बंधुत्व की भावना के साथ वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाएगा।

केशव प्रसाद मौर्य ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मुगल और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले पूर्वजों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्र, स्वाभिमानी और समृद्ध भारत का सपना साकार करना मौजूदा पीढ़ी का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा, “भारत की निरंतर चतुर्दिक प्रगति से स्पष्ट है कि भारत विकास में कई देशों से आगे निकलेगा. विश्व बंधुत्व की भावना से संपूर्ण विश्व का नेतृत्व करेगा. मुगल और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले हमारे वीर पूर्वजों के स्वतंत्र, स्वाभिमानी और समृद्ध भारत के सपने को साकार करना वर्तमान भारत का लक्ष्य है. आदरणीय प्रधानमंत्री जी और भाजपा के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत बनेगा, सबका यह संकल्प अटूट है.”

फिलहाल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शनों को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इस विवाद में चुनाव प्रक्रिया, लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

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