Copper Price Record High: महंगे कॉपर ने बढ़ाई कंपनियों की टेंशन, सरकार से GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग

कॉपर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भारतीय उद्योगों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। धातु की कीमत बढ़ने के साथ-साथ कारोबार में इस्तेमाल होने वाली वर्किंग कैपिटल की जरूरत भी बढ़ रही है। इसका असर कॉपर उत्पादकों से लेकर केबल कंपनियों और डीलर्स तक दिखाई दे रहा है। इसी बीच इंडियन प्राइमरी कॉपर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने सरकार के सामने कॉपर के कुछ उत्पादों पर GST की दर कम करने की मांग रखी है।

एसोसिएशन ने कॉपर के कुछ उत्पादों पर GST को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित पाठक के मुताबिक, अगर GST दर में यह बदलाव किया जाता है तो टैक्स के रूप में फंसी करीब 3.6 अरब डॉलर तक की पूंजी कारोबार में वापस आ सकती है। इससे कंपनियों के पास रोजमर्रा के कारोबार और विस्तार के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर दबाव कम हो सकता है।

GST व्यवस्था से वर्किंग कैपिटल पर बढ़ रहा दबाव

कॉपर उद्योग का कहना है कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था के तहत कॉपर की खरीद और प्रोसेसिंग के दौरान बड़ी रकम टैक्स भुगतान में चली जाती है। अब जब कॉपर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, तो टैक्स से जुड़ी राशि भी बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप कंपनियों की वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ रही है और कारोबार तथा विस्तार के लिए उपलब्ध पूंजी पर दबाव पड़ रहा है।

उद्योग के मुताबिक, GST में कटौती होने पर टैक्स में फंसी पूंजी को दोबारा कारोबार में लगाया जा सकेगा। इससे कंपनियों को अपनी मौजूदा वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ नए निवेश और कारोबार के विस्तार के लिए भी अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश मिल सकती है।

Copper Price ने बनाया रिकॉर्ड, 14,700 डॉलर प्रति टन के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल कॉपर की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। सितंबर में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर की कीमत 14,700 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गई। इस तेजी का सीधा असर भारत में कॉपर से जुड़े कारोबार और निर्माताओं की लागत पर भी पड़ रहा है।

भारत अब पहले की तुलना में कॉपर के आयात पर अधिक निर्भर है। साल 2018 में वेदांता के स्टरलाइट स्मेल्टर के बंद होने के बाद घरेलू सप्लाई पर असर पड़ा था, जिसके बाद कॉपर की जरूरत पूरी करने में आयात की भूमिका बढ़ गई।

Cable कंपनियों और Dealers पर भी महंगे कॉपर का असर

कॉपर की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रभाव केवल प्राथमिक कॉपर उत्पादकों तक सीमित नहीं है। केबल बनाने वाली कंपनियां और डीलर्स भी बढ़ी हुई कीमतों के कारण दबाव का सामना कर रहे हैं। महंगे कॉपर के चलते कारोबारी पहले की तरह लंबे समय तक स्टॉक रखने से बच रहे हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, कई जगहों पर इन्वेंट्री रखने की अवधि हफ्तों से घटकर अब कुछ दिनों तक रह गई है। कारोबारियों के लिए महंगे कॉपर का स्टॉक लंबे समय तक रखना अधिक पूंजी की जरूरत पैदा करता है, इसलिए कंपनियां इन्वेंट्री को कम अवधि के लिए रखने पर जोर दे रही हैं।

उद्योग का मानना है कि कॉपर के कुछ उत्पादों पर GST दर कम होने से कारोबार में फंसी पूंजी वापस उपलब्ध हो सकेगी। इससे कंपनियां अपनी तत्काल जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के निवेश और विस्तार की योजनाओं के लिए भी अधिक पूंजी का इस्तेमाल कर सकेंगी।

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