Basti News: बस्ती में 11 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित, सरकार की योजनाओं के बीच बढ़ी चुनौती

बस्ती जिले में बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के लिए पोषण अभियान सहित कई सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चों का कुपोषित मिलना चिंता का विषय बना हुआ है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल जिले में 11,065 बच्चे कुपोषण की श्रेणी में दर्ज हैं। ऐसे में बस्ती को कुपोषण मुक्त बनाना बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

घर-घर पहुंचकर बच्चों की सेहत और पोषण का लिया जा रहा जायजा

कुपोषण की स्थिति को देखते हुए हाल ही में जिले में विशेष अभियान चलाया गया। इसके तहत बाल विकास परियोजना की टीमों ने गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के घर पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य, पोषण और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी स्थिति का जायजा लिया। टीम के सदस्यों ने बच्चों के अभिभावकों से बातचीत कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य, सही खान-पान और जरूरी देखभाल के बारे में जानकारी दी।

इसके अलावा परिजनों को सरकार की ओर से संचालित कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया, ताकि पात्र बच्चों और उनके परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके।

अति-गंभीर कुपोषित 10 बच्चों को NRC में कराया गया भर्ती

अति-गंभीर कुपोषण से प्रभावित बच्चों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता देने के लिए जिला अस्पताल परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में फिलहाल 10 बच्चों को भर्ती कराया गया है। यहां बच्चों को विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की निगरानी में रखा गया है।

NRC में भर्ती बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ आवश्यक दवाएं और संतुलित आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। चिकित्सकीय निगरानी के जरिए बच्चों की सेहत में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों को दिया जा रहा विशेष पोषाहार

कुपोषण के खिलाफ अभियान में आंगनबाड़ी केंद्रों की भी अहम भूमिका है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कुपोषित और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार विशेष पोषाहार देने की व्यवस्था की गई है।

निर्धारित व्यवस्था के अनुसार छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों को प्रतिदिन 110 ग्राम ऊर्जायुक्त मीठा हलवा दिया जा रहा है। वहीं, एक से तीन वर्ष की आयु के बच्चों को 25 दिनों तक रोजाना 185 ग्राम मीठा हलवा उपलब्ध कराया जा रहा है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए 25 दिनों तक प्रतिदिन 210 ग्राम मीठा हलवा और 12 दिनों तक 210 ग्राम नमकीन दलिया देने का प्रावधान है।

सर्वे जारी, कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने की संभावना

फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों की पहचान, उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच और विशेष पोषाहार उपलब्ध कराने का काम जारी है। विभाग के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जिले के हर पात्र और जरूरतमंद बच्चे तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश कुमार ने इस प्रकरण को लेकर बताया, “बस्ती जिले को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए शासन के निर्देशानुसार लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. जिले में चिन्हित 11,065 कुपोषित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और देखभाल के लिए हमारी टीमें धरातल पर कार्य कर रही हैं. हाल ही में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान टीमों ने सीधे बच्चों के घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया तथा परिजनों को आवश्यक देखभाल व योजनाओं के प्रति जागरूक किया. कहा ये संख्या और बढ़ सकती है, क्यों कि सर्वे अभियान अभी जारी है. ऐसे बच्चों को चिन्हित करने का क्रम चलाया जा रहा है, और उन्हें इस बीमारी से बाहर निकालने की भी पूरी कोशिश की जा रही है.”

डॉक्टरों की निगरानी में हो रहा बच्चों का इलाज

पोषण पुनर्वास केंद्र की डॉक्टर ने बताया, “अति-गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की देखभाल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में फिलहाल 10 बच्चों को भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें दवाएं, नियमित जांच और संतुलित आहार उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए 6 माह से 1 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन 110 ग्राम मीठा हलवा, 1 से 3 वर्ष के बच्चों को 185 ग्राम मीठा हलवा (25 दिन) और 3 से 6 वर्ष के बच्चों को 210 ग्राम मीठा हलवा (25 दिन) व 210 ग्राम नमकीन दलिया (12 दिन) दिया जा रहा है. हमारा प्रयास है कि हर जरूरतमंद बच्चे तक इस योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचे. कहा कि ये संख्या अभी और बढ़ेगी, क्यों कि सर्वे अभियान अभी चलाया जा रहा है ताकि ऐसे कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उनको पर्यवेक्षण में रखा जा सके.”

विभागीय स्तर पर चल रहे सर्वे और निगरानी अभियान के बीच कुपोषित बच्चों की संख्या में आगे बदलाव की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन और बाल विकास विभाग का फोकस ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक देखभाल से जोड़ने पर है।

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