पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कालीघाट मंदिर से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को सदियों पुराने कालीघाट मंदिर में मछली भोग ग्रहण किया। उनका एक वीडियो सामने आने के बाद यह मामला इसलिए सुर्खियों में आ गया क्योंकि इससे कुछ दिन पहले ही बागेश्वर धाम महाराज पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास नॉन-वेज खाना खाने वाले हिंदुओं की आलोचना की थी।
देश के कई हिस्सों में मंदिरों के आसपास मांसाहारी भोजन को लेकर धार्मिक भावनाओं से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल के कुछ मंदिरों में मछली और मांस का भोग चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कालीघाट मंदिर भी ऐसी ही परंपरा के लिए जाना जाता है।
कालीघाट मंदिर में CM शुभेंदु अधिकारी ने खाया मछली भोग
कौशिकी अमावस्या के अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार शाम कालीघाट मंदिर पहुंचे थे। यह दिन शाक्त हिंदुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर में दर्शन के बाद शुभेंदु अधिकारी फर्श पर बैठकर भोग ग्रहण करते हुए नजर आए।
सामने आए वीडियो में उनकी थाली में मछली के सिर का एक बड़ा हिस्सा दिखाई दिया। इसे कालीघाट के पारंपरिक भोग की थाली का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा उन्हें फ्राई की हुई मछली और बासंती पुलाव भी परोसा गया था।
कालीघाट मंदिर में अधिष्ठात्री देवी मां काली को मछली और बलि दिए गए बकरे के मांस का भोग चढ़ाने की परंपरा रही है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भोग लगाए जाने के बाद इसे श्रद्धालुओं को प्रसाद के तौर पर दिया जाता है।
BJP ने शाकाहारी-मांसाहारी विवाद पर क्या कहा?
शुभेंदु अधिकारी का मछली भोग ग्रहण करते हुए वीडियो सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल में एक बार फिर शाकाहारी और मांसाहारी भोजन को लेकर चर्चा तेज हो गई। भाजपा पर अक्सर उत्तर भारतीय राज्यों की ओर से बंगाल की खान-पान की संस्कृति को लेकर सवाल उठाने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, भाजपा ने ऐसे नैरेटिव को कई बार खारिज किया है।
इस मामले पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, ‘विवाद को उसी जगह खत्म होने दीजिए, जहां उसे खत्म होना चाहिए. कालीघाट में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की आस्था, परंपराओं और जीवनशैली का सम्मान करते हुए मां काली के पारंपरिक मछली भोग में हिस्सा लिया. उनके नेतृत्व में भाजपा हमेशा बंगाल के हितों, परंपराओं और राज्य के लिए जो भी सही है, उसके पक्ष में मजबूती से खड़ी रहेगी.’
भाजपा की ओर से साफ तौर पर कहा गया कि बंगाल की धार्मिक परंपराओं और जीवनशैली को देखते हुए इस मुद्दे को शाकाहारी बनाम मांसाहारी खाने की बहस में नहीं बदलना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
दरअसल, यह पूरा विवाद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हालिया टिप्पणियों के बाद तेज हुआ। कोलकाता में कथा के दौरान उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों और देवी की प्रतिमा के आसपास नॉन-वेज खाना बनाने और खाने वाले लोगों की आलोचना की थी।
धीरेंद्र शास्त्री की इस टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल में मांसाहारी भोजन और धार्मिक परंपराओं को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। इसी माहौल के बीच कालीघाट मंदिर में शुभेंदु अधिकारी द्वारा पारंपरिक मछली भोग ग्रहण करने का वीडियो सामने आया, जिसने इस बहस को और चर्चा में ला दिया है।