भारत में LPG और तेल की सप्लाई को लेकर पिछले कुछ समय से बनी चुनौतियों के बीच बड़ी खबर सामने आई है। होर्मुज संकट और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद भारत ने LPG की जरूरत पूरी करने के लिए नया रास्ता तलाश लिया है। अब अमेरिका से भारत के LPG आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है।
भारत एक तरफ घरेलू स्तर पर LPG का उत्पादन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से भी गैस का आयात बढ़ा रहा है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका से LPG की खरीद में बड़ा इजाफा हुआ है।
अमेरिका से LPG Import में 254% की बढ़ोतरी
हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान अमेरिका से भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, खासकर LPG के आयात में सालाना आधार पर 254 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई। इस दौरान अमेरिका से भारत का LPG और संबंधित पेट्रोलियम उत्पादों का आयात बढ़कर करीब 2.60 अरब डॉलर पहुंच गया।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब दुनियाभर में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ था। ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद होर्मुज क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित हुई, जिसका असर तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई पर पड़ा। खाड़ी क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति में रुकावटों के बीच भारत ने अमेरिका से LPG खरीद बढ़ाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए एक वैकल्पिक स्रोत मजबूत किया है।
अप्रैल-जून में LPG Supply को मिला बड़ा Boost
अप्रैल से जून के दौरान अमेरिका से LPG आयात में हुई तेज बढ़ोतरी को वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की रणनीतिक खरीद से जोड़कर देखा जा रहा है। LPG यानी Liquefied Petroleum Gas मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है। तेल मार्केटिंग कंपनियां इन दोनों घटकों को अक्सर अलग-अलग लिक्विड रूप में आयात करती हैं।
जानकारों के मुताबिक, मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान का असर LPG की उपलब्धता पर भी पड़ सकता था। ऐसे में अमेरिका से आयात बढ़ाना भारत के लिए सप्लाई स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अमेरिका से Crude Oil Import में आई बड़ी गिरावट
जहां LPG और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात तेजी से बढ़ा, वहीं अमेरिका से भारत के कच्चे तेल के आयात में इस अवधि में गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2025 के दौरान अमेरिका से भारत ने करीब 3.70 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था। अप्रैल-जून 2026 में यह घटकर करीब 1.57 अरब डॉलर रह गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल के आयात में होने वाला उतार-चढ़ाव भारतीय रिफाइनरियों की व्यावसायिक जरूरतों और खरीद रणनीति पर निर्भर करता है। इसलिए इसमें आई गिरावट को केवल ऊर्जा संकट के असर के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
LPG Import 735 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2.60 अरब डॉलर
आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, विशेष रूप से लिक्विड प्रोपेन और ब्यूटेन का आयात वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में करीब 735 मिलियन डॉलर था। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यह बढ़कर करीब 2.60 अरब डॉलर हो गया।
इस तरह अमेरिका भारत के लिए LPG के एक महत्वपूर्ण आयात स्रोत के रूप में उभर रहा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में जारी अनिश्चितता के बीच अमेरिका से LPG खरीद बढ़ाना भारत की Energy Security रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।