‘पति को खोया, अब नहीं चाहती वही दोहराया जाए’, Chidambaram के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर शहीद की पत्नी का फूटा गुस्सा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ का मुद्दा उठाए जाने के बाद चिदंबरम ने इस पर पलटवार किया था। अब छत्तीसगढ़ के बस्तर की एक शहीद जवान की पत्नी ने चिदंबरम के बयान का खुलकर विरोध किया है और इसकी निंदा की है।

बस्तर के कांकेर की रहने वाली आरती ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि उनके पति सुरक्षा बल में तैनात थे और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के जवान थे। उन्होंने बताया कि सुकमा में नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में उनके पति की जान चली गई थी। आरती ने कहा कि बस्तर में उनके जैसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने नक्सली हिंसा में अपने पतियों को हमेशा के लिए खो दिया है।

चिदंबरम के बयान पर शहीद की पत्नी ने जताई नाराजगी

आरती ने कहा, ‘हम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिंदबरम की तरफ से सोशल मीडिया पर दिए उस बयान का विरोध करते हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह दिमागी नक्सलियों का समर्थन करते हैं और उन्हें दिमागी नक्सल होने पर गर्व है.’

उन्होंने अपने पति की शहादत का जिक्र करते हुए कहा, ‘मेरे पति सुरक्षा बल में तैनात थे. वो स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के जवान थे. सुकमा में नक्सलियों ने घात लगाकर किए हमले में उनकी हत्या कर दी थी. बस्तर में मेरे जैसी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने पतियों को नक्सलियों के हमलों में हमेशा के लिए खो दिया है.’

आरती के मुताबिक, नक्सली हिंसा का दर्द झेल चुके परिवारों के लिए इस तरह के राजनीतिक बयान बेहद संवेदनशील मुद्दा हैं। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में अपने परिजनों को खोने वाले परिवार इस तरह की टिप्पणियों को लेकर गंभीर चिंता महसूस करते हैं।

‘अब बस्तर नक्सल-मुक्त हो गया’

शहीद जवान की पत्नी ने कहा, ‘अब बस्तर नक्सल से मुक्त हो चुका है, लेकिन दिल्ली में बैठे कुछ राजनेता यहां आकर इस तरह की बातें कर रहे हैं कि वो नक्सलियों का समर्थन करते हैं, तो इसीलिए हम यहां (दिल्ली) आए हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं नहीं चाहती हूं कि जो पहले हुआ, वो फिर से दोहराया जाए.’

आरती का कहना है कि उनका उद्देश्य राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा और उनकी चिंताओं को सामने रखना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा नहीं होंगी, जिनमें सुरक्षा बलों और आम लोगों को हिंसा का सामना करना पड़े।

PM Modi ने लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ पर क्या कहा था?

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया था। अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद का अंत हो चुका है, लेकिन उसे वैचारिक समर्थन देने वाले ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी समाज को भ्रमित करने के अवसर की तलाश में हैं।

पीएम मोदी ने कहा था कि ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें समाज से पूरी तरह अलग-थलग करने की जरूरत है। उनके इसी बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

चिदंबरम ने PM Modi के बयान पर क्या कहा था?

पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। उनके इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया।

अब बस्तर की शहीद जवान की पत्नी के बयान ने इस विवाद को एक अलग भावनात्मक और सुरक्षा से जुड़े पहलू से जोड़ दिया है। उन्होंने अपने पति की शहादत का हवाला देते हुए नक्सली हिंसा के समर्थन से जुड़े किसी भी बयान का विरोध किया है।

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