Russia Oil Deal पर Trump Tariff का खतरा? 100% टैरिफ की चर्चा के बीच भारत का बड़ा बयान, जानिए विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका में प्रस्तावित नए कानून ने वैश्विक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। इस प्रस्ताव के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है, जिसमें भारत और चीन समेत पांच देशों के नाम शामिल हैं। इस बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रस्तावित कानून की जानकारी रखती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हम इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और हमें इस प्रस्तावित कानून के बारे में जानकारी है.” रूस से तेल खरीद से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, “जहां तक तेल खरीदने की बात है, हम दुनिया के कई देशों से तेल खरीदते हैं. यह हमारे नजरिए पर निर्भर करता है.”

बताया जा रहा है कि अमेरिका में प्रस्तावित इस विधेयक को लगभग 60 सीनेटरों का समर्थन मिल चुका है। इस कानून का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र और वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाना है ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाली उसकी आय को सीमित किया जा सके। इस प्रस्ताव को डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने आगे बढ़ाया था।

प्रस्तावित कानून के अनुसार रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों—भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान—पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इससे मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और रूस की ऊर्जा आय पर असर पड़ेगा।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की नई वीजा नीति पर भी प्रतिक्रिया दी। हाल ही में अमेरिका ने विदेशी छात्रों, पत्रकारों और अन्य श्रेणियों के आवेदकों के लिए वीजा नियमों को सख्त किया है, जिससे बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक प्रभावित हो सकते हैं।

वीजा नियमों को लेकर रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने वीजा नियमों से जुड़ी कुछ खबरें देखी हैं. वीजा नियम, वीजा जारी करने की प्रक्रिया और आव्रजन से जुड़े मामले किसी भी देश के संप्रभु अधिकार के दायरे में आते हैं.” उन्होंने आगे कहा कि जब भी वैध यात्रियों, छात्रों या अन्य भारतीय नागरिकों को होने वाली परेशानियां भारत सरकार के संज्ञान में आती हैं, तब अमेरिका के समक्ष उन मुद्दों को उठाया जाता है ताकि भारतीयों की कठिनाइयों को कम किया जा सके।

फिलहाल अमेरिका का यह प्रस्तावित कानून अभी पारित नहीं हुआ है, लेकिन यदि इसे मंजूरी मिलती है तो रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

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