UP को ₹25,446 करोड़ की बड़ी सौगात! वाराणसी में बनेंगे दो 6-लेन Elevated Corridors, 20 मिनट में होगा सफर

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी को बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सौगात दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 25,446 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

पहली परियोजना के तहत गंगा नदी के किनारे 46 किलोमीटर लंबा 6-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 14,448 करोड़ रुपये होगी। यह कॉरिडोर वाराणसी और चंदौली जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा।

इस परियोजना में 6-लेन एलिवेटेड मुख्य मार्ग के साथ एक केबल-स्टे ब्रिज, एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद NH-19 (प्रयागराज-वाराणसी), BHU-रामनगर मार्ग और NH-35 (वाराणसी-मिर्जापुर) पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होने की उम्मीद है।

इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट, IIT-BHU, नमो घाट, काशी रेलवे स्टेशन, रामनगर किला और वाराणसी रिंग रोड तक निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी। इस कॉरिडोर के बनने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में औसत यात्रा समय करीब 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा।

दूसरी परियोजना के तहत वरुणा नदी के किनारे 43 किलोमीटर लंबा 6/4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिसकी लागत 10,998 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगी। इसमें मुख्य कैरिजवे के साथ फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड का भी निर्माण किया जाएगा।

वाराणसी में हर वर्ष लगभग 15 करोड़ पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में यह परियोजना शहर के भीतर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके पूरा होने के बाद NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक का सफर 40 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा।

80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाले इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से वाराणसी एयरपोर्ट, वाराणसी जंक्शन, वाराणसी कैंट, चौका घाट, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी रेलवे स्टेशन और नमो घाट तक बेहतर संपर्क सुविधा मिलेगी।

दोनों परियोजनाओं का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा। इनके पूरा होने से वाराणसी में ट्रैफिक जाम कम होने के साथ-साथ पर्यटन, तीर्थाटन, माल परिवहन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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