असम की सियासत में बड़ा मोड़ तब आया जब कांग्रेस नेता Pawan Khera को गुवाहाटी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिली और अब उन्होंने Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि अदालत ने इस पूरे मामले को महज मानहानि नहीं बल्कि साजिश करार दिया है और हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई है।
हाईकोर्ट के फैसले से बढ़ी टेंशन
Gauhati High Court ने अपने आदेश में साफ कहा कि मामला गंभीर है और इसमें साजिश के तत्व नजर आते हैं। अदालत ने पुलिस को हिरासत में पूछताछ की अनुमति देने का संकेत दिया। ऐसे में अगर सुप्रीम कोर्ट भी इस फैसले को बरकरार रखता है, तो पवन खेड़ा की गिरफ्तारी संभव हो सकती है।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला असम चुनाव प्रचार के दौरान शुरू हुआ, जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पत्नी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में बड़ी संपत्तियां भी हैं।
इन आरोपों के बाद असम में खेड़ा के खिलाफ जालसाजी और मानहानि के मामले दर्ज किए गए। वहीं मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी Riniki Bhuyan Sarma ने भी कानूनी कार्रवाई की।
पहले मिली थी राहत, फिर लगा झटका
इस मामले में पहले Telangana High Court से पवन खेड़ा को ट्रांजिट बेल मिली थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। इसके बाद गुवाहाटी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने से उनकी कानूनी स्थिति और कमजोर हो गई।
आरोप क्या-क्या लगाए गए थे?
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास संयुक्त अरब अमीरात, एंटीगुआ और बारबुडा और मिस्र से जुड़े पासपोर्ट हैं। साथ ही दुबई में दो संपत्तियां होने का दावा किया गया। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के व्योमिंग में रजिस्टर्ड एक कंपनी के जरिए हजारों करोड़ की संपत्ति होने का भी आरोप लगाया था। इन सभी आरोपों को लेकर विवाद गहराया और मामला अदालत तक पहुंच गया।
कांग्रेस पार्टी भी मैदान में
इस पूरे विवाद में कांग्रेस पार्टी खुलकर पवन खेड़ा के समर्थन में आ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि खेड़ा की अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि पवन खेड़ा को राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।