उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से चुनावी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने टिकट वितरण को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर टिकट के दावेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने बताया कि आगामी चुनाव में उम्मीदवार चयन पूरी तरह जीत की संभावना और सामाजिक समीकरणों के आधार पर किया जाएगा।
टिकट पाने के लिए रखी साफ शर्त
अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी उन्हीं नेताओं को टिकट देगी जो समाजवादी विचारधारा और सामाजिक न्याय की लड़ाई से जुड़े हों। उन्होंने कहा, “जितने भी समाजवादी सोच के लोग हैं, सेक्युलर सोच के लोग हैं, लोकतंत्र को मजबूत करने वाले लोग हैं और जो लोग सामाजिक न्याय का संघर्ष करते रहे हैं. जो पीडीए के लिए लड़ेगा और जो जीतने वाला होगा वही टिकट पाएगा और समीकरण के आधार पर ही हम लोग लोगों को मौका देंगे.”
इस बयान को पार्टी के भीतर टिकट वितरण की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजेपी नेताओं पर भी साधा निशाना
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे बीजेपी के दो डिप्टी सीएम को लेकर दिए गए उनके पुराने बयान पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब उन्हें जानकारी मिल चुकी है कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ एक भी विधायक नहीं है।
केशव प्रसाद मौर्य के भविष्य में बीजेपी सरकार बनने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “वो अपने कुर्ते का साइज बता रहे हैं. जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं भ्रष्टाचार से उनके सब पेट वेट बढ़ता चला जा रहा है.”
कानून-व्यवस्था को लेकर लगाए गंभीर आरोप
सपा प्रमुख ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “आप फेक एनकाउंटर करा रहे हैं, आप फेक एनकाउंटर में नंबर वन बन गए हैं. केवल यह साबित करने के लिए कि लॉ एंड ऑर्डर बेहतर है.”
उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र करते हुए दावा किया कि अलग-अलग पदों पर बड़ी रकम पकड़े जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं और विपक्ष आवाज उठाना बंद कर दे तो हालात और खराब हो सकते हैं।
चुनावी रणनीति का स्पष्ट संकेत
अखिलेश यादव के इस बयान को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है कि टिकट केवल संगठनात्मक सक्रियता, सामाजिक समीकरण और जीत की क्षमता के आधार पर ही दिया जाएगा। इससे साफ है कि समाजवादी पार्टी इस बार उम्मीदवार चयन में कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही।