भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड एग्रीमेंट (व्यापार समझौते) को लेकर देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने इस डील को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. बुधवार (04 फरवरी) को बारामती में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों का भारत में आना हमारे किसानों के लिए मुसीबत बन सकता है. पवार ने साफ किया कि अमेरिका की नई टैरिफ पॉलिसी भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक चुनौती साबित हो सकती है.
किसानों के लिए खतरे की घंटी?
शरद पवार ने इस समझौते के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभी पूरी तस्वीर साफ होने में दो दिन का समय लगेगा. हालांकि, जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक अमेरिका को भारत में कृषि उत्पाद निर्यात करने की छूट मिल गई है. पवार ने इसे घरेलू किसानों के लिए चिंता का विषय बताया.
उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था है और वहां से बड़े पैमाने पर कृषि निर्यात अन्य देशों के स्थानीय उत्पादकों को नुकसान पहुंचा सकता है. मुझे उम्मीद है कि भारतीय कृषि क्षेत्र की रक्षा की जाएगी.’’
अमेरिका ने कहा- यह शानदार समझौता है
दूसरी तरफ, अमेरिका इस डील को अपनी बड़ी जीत मान रहा है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बात कर यह समझौता किया है.
कैरोलिन लेविट ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने भारत के साथ एक और बड़ा व्यापार समझौता किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे बात की.”
रूस से तेल खरीदना बंद करेगा भारत?
व्हाइट हाउस की तरफ से तेल खरीद को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है. कैरोलिन लेविट ने कहा, ”दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. भारत न केवल रूस से तेल खरीदना बंद करने के लिए प्रतिबद्ध है बल्कि अमेरिका से तेल खरीदने के लिए भी प्रतिबद्ध है. संभवतः वेनेजुएला से भी जिससे हमें पता है कि अब अमेरिका और अमेरिकी जनता को सीधा लाभ होगा.’’
500 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश
लेविट ने यह भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है. यह निवेश परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा. अमेरिका का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप की बदौलत यह दोनों देशों के बीच एक और ऐतिहासिक और शानदार व्यापार समझौता है.