मगरमच्छ के आंसू नहीं चलेंगे! कर्नल सोफिया पर बोलने वाले मंत्री की बढ़ी मुश्किलें, SC ने सरकार से पूछा- अब तक चुप क्यों?

मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के लिए कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिया गया विवादित बयान अब गले की फांस बनता जा रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद की गई टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत इस बात से हैरान थी कि विशेष जांच दल (SIT) ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने (अभियोजन) की अनुमति काफी पहले मांग ली थी, लेकिन सरकार ने उस फाइल को अभी तक ठंडे बस्ते में डाल रखा है। विजय शाह ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट का गुस्सा फूट पड़ा।

5 महीने से फाइल पर बैठी है सरकार

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने तारीखों का हवाला देते हुए सरकार को फटकार लगाई। जब सरकारी वकील ने दलील दी कि एसआईटी रिपोर्ट पर विचार किया जा रहा है, तो सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘आप 19 अगस्त, 2025 से एसआईटी रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं ले सके हैं और अब 19 जनवरी हो गई है.’ कोर्ट ने बताया कि एसआईटी ने सील कवर रिपोर्ट में जांच के बाद विजय शाह के खिलाफ केस चलाने की सिफारिश सरकार को भेजी थी। सीजेआई सूर्यकांत ने आदेश देते हुए कहा, ‘हम मध्य प्रदेश सरकार को कानून के तहत मंजूरी के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देते हैं.’

‘माफी में अब देर हो गई’

मंत्री विजय शाह की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने माफी मांग ली है और वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। इस दलील को सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे साफ शब्दों में कहा, ‘कहां है आपका माफीनामा… रिकॉर्ड में कुछ नहीं है और अब बहुत देर हो चुकी है.’ कोर्ट ने पहले भी मंत्री की सार्वजनिक माफी को कानूनी कार्रवाई से बचने का पैंतरा और ‘मगरमच्छ के आंसू’ बताते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने उनकी ऑनलाइन माफी पर भी असंतोष जाहिर किया था।

खुफिया विभाग के डीआईजी भी हुए तलब

अदालत में खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती भी मौजूद थे। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वे उन पहलुओं की भी जांच करें जिनका जिक्र अन्य याचिकाओं में किया गया है। एसआईटी रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ है कि जांच टीम ने विभिन्न पहलुओं को खंगाला है, लेकिन इसमें याचिकाकर्ता के पुराने मामलों को शामिल नहीं किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद मध्य प्रदेश सरकार को मंत्री विजय शाह पर जल्द ही कोई फैसला लेना होगा।

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