Pax Silica: चीन की बादशाहत खत्म करने के लिए अमेरिका का बड़ा दांव, भारत को ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होने का मिला न्योता

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अब एक नए और ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचने जा रही है। अमेरिका ने तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में चीन के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए भारत को अपने महत्वाकांक्षी गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) का पूर्ण सदस्य बनाने का फैसला किया है। भारत में अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत और डोनाल्ड ट्रम्प के बेहद करीबी माने जाने वाले सर्जियो गोर ने दिल्ली में अपने पहले संबोधन में यह बड़ी घोषणा की है।

अगले महीने औपचारिक तौर पर मिलेगा निमंत्रण

सर्जियो गोर ने दिल्ली में ऐलान किया कि दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र का एक मंच पर साथ आना गर्व की बात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर मिशन और ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए भारत की भूमिका अहम होगी।

राजदूत गोर ने अपने संबोधन में कहा, “मैं आज आपके साथ एक नई पहल भी शेयर करना चाहता हूं. इसे यूनाइटेड स्टेटस ने पिछले महीने शुरू किया है. इसका नाम पैक्स सिलिका है. पैक्स सिलिका एक यूएस नेतृत्व वाला संगठन है. इसका मकसद जरूरी मिनरल्स और एनर्जी इनपुट से लेकर एंडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, AI, डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स तक एक सुरक्षित समृद्ध और इनोवेशन वाली सिलिकॉन सप्लाई चैन बनाना है. पिछले महीने इस में जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इजरायल शामिल हुए हैं. आज मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अगले महीने भारत को इस देश के समूह में पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए इनवाइट किया जाएगा. जैसे-जैसे दुनिया नई टेक्नोलॉजी अपना रही है, यह जरूरी है कि भारत और यूनाइटेड स्टेट्स इस पहल में शुरुआत से ही मिलकर काम करें.”

आखिर क्या है ‘पैक्स सिलिका’?

‘पैक्स सिलिका’ अमेरिका की अगुवाई में शुरू किया गया एक रणनीतिक गठबंधन है, जिसका मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन को सुरक्षित और चीन से स्वतंत्र बनाना है। इस शब्द की उत्पत्ति ऐतिहासिक ‘पैक्स रोमाना’ (रोमन शांति) और ‘पैक्स सिनिका’ (चीनी शांति) से हुई है, जहां ‘सिलिका’ का अर्थ आधुनिक सिलिकॉन टेक्नोलॉजी से है। इस गठबंधन में पहले से ही जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और इजरायल जैसे देश शामिल हो चुके हैं। इसका सीधा मकसद तकनीक के क्षेत्र में चीन के एकाधिकार को कम करना है।

मोदी-ट्रम्प की दोस्ती को बताया ‘असली’

राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्तों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मोदी और ट्रंप की दोस्ती असली है.” उन्होंने संकेत दिए कि अगले एक-दो सालों में राष्ट्रपति ट्रम्प भारत का दौरा भी कर सकते हैं। वहीं, ट्रेड डील पर चल रही चर्चा को लेकर उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों में बातचीत चल रही है. अगली चर्चा कल होगी. भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है. इसे फाइनल स्टेज पर पहुंचाना आसान काम नहीं है. हम इसे पूरा करने के इरादे से काम कर रहे हैं.”

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