नई दिल्ली: आवारा कुत्तों (Stray Dogs) की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को एक दिलचस्प वाकया हुआ। जजों ने कुत्तों के व्यवहार को लेकर एक निजी अनुभव साझा किया, जिसे सुनकर कोर्ट रूम में मौजूद ‘डॉग लवर्स’ (Dog Lovers) खुश हो गए, लेकिन जजों ने तुरंत उन्हें टोक भी दिया।
कोर्ट रूम ड्रामा: क्या हुआ सुनवाई में?
- जज का ऑब्जर्वेशन:जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा, “कुत्ता हमेशा उन लोगों को पहचान जाता है, जो उससे डरते हैं। जब भी उसे किसी इंसान के लिए ऐसा महसूस होता है, तो वह उन पर हमला कर देता है। हम यह बात अपने निजी अनुभव से बता रहे हैं।”
- डॉग लवर्स का रिएक्शन और जज की फटकार:जज की यह बात सुनकर कोर्ट में मौजूद डॉग लवर्स सहमति में अपना सिर हिलाने लगे। इस पर बेंच ने तुरंत उन्हें टोका और कहा-“अपना सिर मत हिलाओ। अगर कुत्तों को लगता है कि आप उनसे डर रहे हैं, तो बहुत ज्यादा संभावना है कि वो तुम पर हमला करेगा। तुम्हारा पालतू कुत्ता भी ऐसा कर सकता है।” (यानी कोर्ट यह तर्क दे रहा था कि यह व्यवहार खतरनाक भी हो सकता है, इसे सही नहीं ठहराया जा रहा)।
वकील की दलील: ‘कुत्तों का इलाका और गैंगवार’
सुनवाई के दौरान एक वकील ने कुत्तों के टेरिटोरियल (क्षेत्रीय) व्यवहार को लेकर अहम मुद्दे उठाए:
- इलाका: कुत्ते अपने क्षेत्र को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं। हर 200-300 मीटर के बाद उनका इलाका बदल जाता है।
- शिफ्टिंग में दिक्कत: अगर 500 मीटर दूर कोई फीडिंग पॉइंट (चारागाह) बनाया जाए, तो वहां जाने के लिए एक कुत्ते को दूसरे कुत्तों के इलाके से गुजरना पड़ेगा, जिससे लड़ाई (Gangwar) होगी।
- भीड़: जहां खाना दिया जाएगा, वहां कुत्तों की तादाद बढ़ जाएगी, जिससे वहां रहने वालों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
- शिकायतें: वकील ने बताया कि RWA हेल्पलाइन पर डॉग बाइट की 20,000 शिकायतें मिली हैं।
मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें आवारा कुत्तों को हटाने, नसबंदी करने और उन्हें वापस छोड़ने के पुराने आदेशों में संशोधन की मांग की गई है।