नई दिल्ली/हैदराबाद: सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ‘आश्चर्यजनक’ बताते हुए सवाल उठाया है कि जब गंभीर आरोपों वाले अन्य कैदियों को रिहाई मिल सकती है, तो इन दोनों छात्र नेताओं को जेल में क्यों रखा जा रहा है।
ओवैसी ने की अन्य मामलों से तुलना
ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए हालिया जमानतों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “आज का अखबार देखें तो सुप्रीम कोर्ट ने अमटेक ग्रुप के पूर्व चेयरमैन को बेल दिया है, जो 16 महीने से जेल में थे. कैलाश रामचंदानी को जमानत दे दी गई, जिन पर आईडी ब्लास्ट का केस था. जबकि सुप्रीम कोर्ट से शरजील इमाम और उमर खालिद को बेल नहीं मिली.”
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में अपनी निराशा जाहिर करते हुए ओवैसी ने कहा, “यह आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला है कि इन दोनों लोगों को उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिली है.” गौरतलब है कि कोर्ट ने इसी केस में गुलफिशा फातिमा और मीरान हैदर समेत 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है।
एक साल तक नहीं मांग सकेंगे जमानत
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ये दोनों आरोपी अगले एक साल तक जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे। अदालत ने कहा कि यदि एक साल के भीतर गवाही की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तभी वे निचली अदालत में दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बहन की शादी के लिए मिली थी थोड़ी राहत
बता दें कि उमर खालिद को हाल ही में अपनी बहन के निकाह में शामिल होने के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट ने 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत दी थी। इस दौरान उन पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल और गवाहों से मिलने पर सख्त पाबंदी थी। 29 दिसंबर की शाम को उन्होंने वापस सरेंडर कर दिया था। सितंबर 2020 में गिरफ्तार किए गए खालिद और शरजील पर यूएपीए (UAPA) के तहत दिल्ली में दंगे भड़काने की साजिश रचने का आरोप है।