ऑपरेशन सिंदूर में भारत के खिलाफ चीन ने रची थी भयानक साजिश, पेंटागन की रिपोर्ट में खुल गया ग्रे-जोन का राज

वाशिंगटन/नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर सात महीने बाद एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में दावा किया है कि इस संघर्ष के दौरान भारत का मुकाबला सिर्फ पाकिस्तान से नहीं था, बल्कि परदे के पीछे से चीन भी अपने ‘सदाबहार दोस्त’ की मदद कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, जब पाकिस्तानी सेना कमजोर पड़ रही थी, तब चीन ने अपनी ‘ग्रे-जोन’ रणनीति के तहत उसे खुफिया और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी। यह खुलासा भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से एक नई चुनौती बनकर उभरा है।

मैदान में आए बिना ऐसे की पाकिस्तान की मदद

पेंटागन की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने बहुत चालाकी से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को सीधे युद्ध के मैदान में नहीं उतारा, ताकि दुनिया के सामने वह अपनी संलिप्तता से साफ इनकार कर सके। इसके बजाय उसने तीन खतरनाक तरीकों से पाकिस्तान को बैकअप दिया। चीन ने अपने उन्नत सैटेलाइट कवरेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को भारतीय सेना की मूवमेंट की ‘रीयल-टाइम’ मॉनिटरिंग दी। इसी खुफिया इनपुट की बदौलत पाकिस्तानी सेना बेहतर टारगेटिंग और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन कर पाई।

साइबर हमले और झूठ फैलाने का खेल

रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने सिर्फ खुफिया मदद ही नहीं दी, बल्कि ‘इंफॉर्मेशन वारफेयर’ यानी सूचना युद्ध का भी सहारा लिया। चीन ने बड़े पैमाने पर ऑनलाइन कैंपेन चलाए, जिनका मकसद भारत के आरोपों को धुंधला करना और दिल्ली के दावों पर सवाल उठाना था। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के नैरेटिव को सच साबित करने के लिए चीन ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इसके अलावा, साइबर हमलों और कूटनीतिक चालों के जरिए संघर्ष को बढ़ने से रोका गया, लेकिन भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव लगातार बनाए रखा गया।

चीन की रणनीति और ऑपरेशन सिंदूर का सच

पेंटागन का मानना है कि चीन भारत को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती मानता है। वह पाकिस्तान का इस्तेमाल एक ‘प्रेशर वॉल्व’ की तरह करता है ताकि भारत सीमा विवादों में उलझा रहे और अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग न बढ़ा सके। गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ 7 मई से 10 मई 2025 तक चला था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी। भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर निर्णायक बढ़त हासिल की थी, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि भारत को भविष्य में ‘टू-फ्रंट वॉर’ के हाइब्रिड मॉडल के लिए तैयार रहना होगा।

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