सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर हो रही ठगी की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए, इससे जुड़े सभी केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को ट्रांसफर कर दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों ने सीबीआई को जांच की सामान्य सहमति नहीं दे रखी है, वह भी अपने यहां दर्ज ‘डिजिटल अरेस्ट’ के केस सीबीआई को सौंप दें।
सोमवार (1 दिसंबर) को चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की जांच को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं:
सीबीआई को जांच के लिए पूरी आजादी
- जांच का दायरा: अपराध के बड़े दायरे को देखते हुए सीबीआई को जांच को लेकर पूरी आजादी है। एजेंसी इंटरपोल की भी मदद ले सकती है।
- सहयोग अनिवार्य: आईटी रूल्स, 2021 के तहत आने वाली सभी संस्थाएं जांच में सहयोग करें। ठगी में इस्तेमाल संदिग्ध नंबर का डेटा सुरक्षित रखा जाए और जांच एजेंसी को उपलब्ध करवाया जाए।
बैंकों और टेलीकॉम पर सख्ती के निर्देश
- खाते फ्रीज: ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों को तुरंत फ्रीज किया जाए।
- बैंक अधिकारियों की भूमिका: सीबीआई डिजिटल अरेस्ट स्कैम में इस्तेमाल बैंक खातों को खोलने और चलने देने में बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर सकती है।
- RBI से मांग: रिजर्व बैंक बताए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर किस तरह संदिग्ध खातों की पहचान और उन्हें फ्रीज करने की कार्रवाई की जा सकती है।
- टेलीकॉम विभाग से मांग: एक ही नाम पर कई सिम जारी होना चिंताजनक है। दूरसंचार विभाग इससे निपटने के उपाय बताए और टेलीकॉम कंपनियों पर इसे लेकर सख्ती हो।
SIT गठन और आगे की सुनवाई
कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह दो हफ्ते के अंदर ऐसे विशेषज्ञों के नाम सुझाए, जो इंटरनेट ठगी के विषय की जानकारी रखते हैं। इन विशेषज्ञों और सीबीआई अधिकारियों को मिलाकर एक एसआईटी (SIT) बनाने पर विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल डिजिटल अरेस्ट पर सुनवाई हो रही है। इसके बाद इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और पार्ट टाइम जॉब के नाम पर होने वाली ठगी पर भी सुनवाई की जाएगी।