बिहार चुनाव 2025: पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग, शाम 5 बजे तक 60% से ज्यादा मतदान

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग ने इस बार सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। गुरुवार (6 नवंबर) को 121 सीटों पर हुए मतदान में शाम 5 बजे तक 60.13% वोटिंग दर्ज की गई, जो 2020 के चुनाव में हुई 55.81% वोटिंग से करीब 4.3 प्रतिशत ज्यादा है।

2020 और 2015 से अधिक मतदान

मुख्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2020 में कुल 243 सीटों पर 58.7% वोटिंग हुई थी, जबकि 2015 में यह आंकड़ा 56.9% था।
इस बार मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला, खासकर ग्रामीण इलाकों में लोगों ने लंबी कतारों में खड़े होकर वोट डाले।

बेगूसराय में सबसे ज्यादा मतदान

शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, बेगूसराय जिले ने सबसे आगे रहते हुए 67.32% मतदान दर्ज किया।
इसके अलावा —

  • मधेपुरा में 65.74%
  • गोपालगंज में 64.96%
  • समस्तीपुर में 66.65%
  • सारण में 60.90%
  • सहरसा में 62.65%
  • लखीसराय में 62.76%
  • खगड़िया में 60.65% वोटिंग दर्ज की गई।

वहीं राजधानी पटना में 55.02%, गाजियाबाद में 331 AQI जैसे हालात तो नहीं, लेकिन राजनीतिक तापमान चरम पर रहा।

प्रमुख उम्मीदवारों की सीटों पर उत्साह

पहले चरण की वोटिंग कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर खास रही —

  • राघोपुर (तेजस्वी यादव) – 64.01%
  • महुआ (तेज प्रताप यादव) – 54.88%
  • तारापुर (सम्राट चौधरी) – 58.33%
  • लखीसराय (विजय कुमार सिन्हा) – 60.51%
  • छपरा (खेसारी लाल यादव) – 56.32%
  • अलीनगर (मैथिली ठाकुर) – 58.05%
  • मोकामा (अनंत सिंह) – 60.16%
  • भोरे (प्रीति किन्नर) – 61.05%
  • सीवान (मंगल पांडे) – 57.38%
  • सरायरंजन (विजय कुमार चौधरी) – सबसे ज्यादा 70.19%
  • लालगंज (शिवानी शुक्ला) – 60.17%
  • रघुनाथपुर (ओसामा शहाब) – 51.18%

दोपहर तक भी बढ़ता रहा मतदान प्रतिशत

दोपहर 3 बजे तक ही अधिकांश जिलों में 50% से ज्यादा वोटिंग दर्ज हो चुकी थी।
उदाहरण के तौर पर,

  • बेगूसराय – 59.82%
  • गोपालगंज – 58.17%
  • दरभंगा – 51.75%
  • मुजफ्फरपुर – 58.40%
  • नालंदा – 52.32%
  • सहरसा – 55.22%
  • सीवान – 50.93%

कुल मिलाकर मतदान में रिकॉर्ड तोड़ उत्साह

चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और इस बार का मतदान प्रतिशत बिहार की राजनीति में “बदलाव के संकेत” के रूप में देखा जा रहा है।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी इस बार पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक रही।

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