नई दिल्ली. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लागू करने की धमकी के बाद अब वैश्विक कूटनीति में हलचल मच गई है। भारत ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी है और अब चर्चाएं जोरों पर हैं कि क्या भारत, चीन और रूस के साथ मिलकर एक नई वैश्विक तिकड़ी बना सकता है? अगर ऐसा होता है, तो अमेरिका और यूरोप की मौजूदा आर्थिक शक्ति संतुलन को गहरी चुनौती मिल सकती है।
क्या रूस-भारत-चीन बन सकते हैं नया महाशक्ति केंद्र?
इस साल की शुरुआत में रूसी विदेश मंत्री ने ट्रंप की धमकियों के जवाब में भारत, चीन और रूस की त्रिपक्षीय शक्ति को पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया था। अब जब ट्रंप ने टैरिफ की तलवार चलाई है, तो इस विचार को गंभीरता से लिया जा रहा है।
- यदि ये तीनों देश एक साथ आते हैं, तो एशिया में एक नया शक्ति केंद्र उभर सकता है, जो अमेरिका और यूरोप के प्रभुत्व को कमजोर कर सकता है।
- डॉलर की वैश्विक पकड़ पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि तीनों देश अपनी मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं।
- रूस की रक्षा तकनीक, भारत का प्रतिभा बल और चीन की विनिर्माण शक्ति मिलकर अमेरिका-नाटो का मुकाबला कर सकती है।
- साझा ट्रेड नेटवर्क और वैकल्पिक सप्लाई चेन ग्लोबल अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकते हैं।
डोवाल की मास्को यात्रा से मिले संकेत
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल इन दिनों रूस दौरे पर हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के टैरिफ फैसले के बाद यह यात्रा और अधिक रणनीतिक हो गई है। उनके साथ रूस में अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकॉफ की मौजूदगी ने कूटनीतिक समीकरण और जटिल बना दिए हैं।
इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी जल्द ही रूस जाएंगे और पीएम मोदी इसी महीने चीन की यात्रा पर होंगे। माना जा रहा है कि इन सभी यात्राओं में अमेरिका की टैरिफ रणनीति के खिलाफ संयुक्त जवाब की योजना पर बात होगी।
पीएम मोदी की चीन यात्रा की अहमियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जा रहे हैं। यह यात्रा अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच हो रही है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समीकरण और मज़बूत हो सकते हैं।
भारत और चीन दोनों रूस से तेल खरीदते हैं और ट्रंप की धमकियों के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दोनों देशों ने अमेरिका के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाए हैं — जहां एक ओर अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम और फर्टिलाइज़र खरीद रहा है, वहीं भारत और चीन पर आर्थिक दबाव बना रहा है।
अमेरिका को मिलेगा तगड़ा जवाब?
अगर भारत, चीन और रूस एक साझा रणनीतिक मोर्चा बनाते हैं, तो अमेरिका के लिए यह सबसे बड़ा भू-राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को कड़ी चुनौती मिलेगी और वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव संभव है।