मुझसे कन्या वध हो गया, मुझे फांसी दे दो – राधिका यादव की हत्या के बाद पिता दीपक की आखिरी इच्छा, चौंकाने वाले खुलासे

गुरुग्राम – गुरुग्राम के सुशांत लोक इलाके में 25 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। राधिका की गोली मारकर हत्या उनके पिता दीपक यादव ने की, जिसके बाद उन्होंने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। अब इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।

‘भाई, मैंने कन्या वध कर दिया है, मुझे मार दो’

राधिका के चाचा विजय यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वारदात के बाद दीपक ने खुद उन्हें फोन कर कहा –
“भाई, मैंने कन्या वध कर दिया है। मुझे मार दो।”

विजय के अनुसार, दीपक बेहद तनावग्रस्त थे और उन्होंने हत्या का कोई ठोस कारण नहीं बताया। उन्होंने केवल इतना कहा कि वे मानसिक रूप से असंतुलित हो गए थे।

पुलिस स्टेशन में भी जताई फांसी की इच्छा

दीपक यादव ने थाने में भी यही बात दोहराई और कहा,
“अगर इसके लिए फांसी का नियम है, तो मुझे फांसी दे दो। FIR ऐसी बनाओ कि मुझे फांसी हो।”
यह बयान उनकी आत्मग्लानि और मानसिक स्थिति को दर्शाता है।

टेनिस ही था राधिका का पूरा फोकस

चाचा विजय यादव ने यह भी बताया कि राधिका हर दिन सुबह 5 बजे टेनिस ट्रेनिंग के लिए जाती थीं और शाम को पिता उन्हें वापस लेकर आते थे। उन्होंने अन्य गतिविधियों से खुद को अलग कर सिर्फ टेनिस पर ध्यान केंद्रित किया हुआ था।

‘अकादमी नहीं खोली थी, घर पहले से संपन्न था’

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि राधिका ने खुद की टेनिस अकादमी खोली थी, लेकिन विजय यादव ने इसे झूठा बताया। उन्होंने कहा कि राधिका ने कोई अकादमी शुरू नहीं की थी और परिवार पहले से ही आर्थिक रूप से संपन्न था। उन्होंने बताया कि जब गांव में लोग कच्चे मकानों में रहते थे, उस समय दीपक यादव के पास पक्का घर था।

पुलिस जांच के केंद्र में सोशल मीडिया और पारिवारिक तनाव

पुलिस ने दीपक यादव को गिरफ्तार कर लिया है और अब हत्या के पीछे की वजहों की पड़ताल कर रही है।

  • पारिवारिक तनाव,
  • राधिका की सोशल मीडिया पर सक्रियता,
  • और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता जैसे पहलुओं को लेकर छानबीन की जा रही है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दीपक यादव अपनी बेटी की सोशल स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को लेकर परेशान थे, हालांकि इसकी पुष्टि अभी जांच के बाद ही की जाएगी।

इस दर्दनाक वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या यह मानसिक बीमारी का मामला है? क्या बेटियों की स्वतंत्रता अब भी कुछ घरों में असहनीय बोझ बन चुकी है? पुलिस की विस्तृत जांच और अदालत की प्रक्रिया ही इस हत्याकांड की सच्चाई को पूरी तरह सामने ला सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *