संविधान की प्रति को हाथी पर रखकर निकाली थी यात्रा… पीएम मोदी ने लोकसभा में बताई यह कहानी

भारतीय संविधान का 75वां वर्षगांठ पूरा देश मना रहा है. लोकसभा में संविधान पर दो दिनों की चर्चा हुई. शनिवार को पीएम मोदी ने संविधान पर हुई चर्चा का जवाब दिया. पीएम मोदी ने लोकसभा में संविधान पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए संविधान के 60 साल के पूरे होने पर गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने संविधान की प्रति हाथी पर रखकर भव्य यात्रा निकाली थी. इसका जिक्र किया और संविधान के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया.लोकसभा में संविधान में चर्चा पर हुई बहस का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संविधान के 75 साल हो रहे है. हमारे यहां 25 साल का भी महत्व होता है. 50 साल का भी महत्व होता है और 75 साल का भी महत्व होता है. इतिहास की तरफ नजर करें. संविधान यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव का क्या हुआ था?
कांग्रेस के माथे पर ये जो पाप है, ये कभी भी धुलने वाला नहीं है!
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान का 25 साल पूरा हो रहा था. उस समय संविधान को नोच दिया गया. इमरजेंसी लाया गया. संवैधानिक व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया. देश को जेलखाना बना दिया गया. नागरिकों के अधिकारों को लूट लिया गया. प्रेस की स्वतंत्रता को ताले लगा दिया गया. कांग्रेस के माथे पर यह पाप कभी भी धुलने वाला नहीं है. लोकतंत्र का गला घोट दिया गया था.उन्होंने कहा कि जब 50 साल हुए, तब क्या भुला दिया गया था? अटल बिहारी वाजपेयी सरकार थी. देश भर में संविधान का 50वां साल मनाया गया था. अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को विशेष संदेश दिया था. संविधान की भावना को जीने का प्रयास किया था.
हाथी पर संविधान की प्रति रखकर निकाली गई थी गौरव यात्रा
उन्होंने कहा कि जब देश संविधान का 60 साल मना रहा था. यह मेरा भी सौभाग्य था. मुझे भी संविधान के कारण मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिल गया था. तब मैं मुख्यमंत्री था. उसी समय संविधान के 60 साल हुए. मुख्यमंत्री के नाते तय किया था. गुजरात में संविधान के 60 साल मनाएंगे.उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार हुआ. संविधान के ग्रंथ को हाथी पर रखा गया और संविधान की गौरव यात्रा निकाली गई. राज्य के सीएम उस संविधान के नीचे पैदल चल रहा था और देश को संविधान का महत्व समझाने का प्रयास कर रहा था. हमारे लिए संविधान का महत्व क्या है?उन्होंने कहा कि आज संविधान के 75 साल हुए. मुझे अवसर मिला. जब 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की बात कही थी, तब कहा गया था कि 26 जनवरी तो है. मेरे लिए खुशी की बात है कि इस विशेष सत्र में संविधान की विविधता पर चर्चा होती. हर की अपनी मजबूरियां होती हैंय हर कोई अपना दुख प्रकट करता है. कईयों ने अपनी विपलता प्रगट किया है.

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