भारत ने आर्मेनिया को दिया ‘आकाश’ सुरक्षा कवच तो सकते में क्यों पाकिस्तान, उसका क्या नुकसान

श्चिमी एशिया के मित्र देश आर्मेनिया को भारत ने पहली आकाश एयर डिफेंस बैटरी बेची है। इसके साथ ही भारत ने रक्षा निर्यात क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। ब्रह्मोस मिसाइल बेचने के बाद यह दूसरा हवाई रक्षा कवच है, जिसकी विदेशों में मांग बढ़ी है।

रक्षा मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने बताया कि भारत ने पहली आकाश मिसाइल सिस्टम बैटरी एक मित्र देश को निर्यात किया गया है। यह स्वदेशी रूप से विकसित वायु रक्षा प्रणाली की पहली अंतरराष्ट्रीय बिक्री है।

हालांकि, BEL ने उस देश का नाम नहीं बताया है, जिसे उसने आकाश सिस्टम का निर्यात किया है लेकिन रक्षा सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है कि भारत ने आर्मेनिया को ही यह सिस्टम निर्यात किया है। सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय में रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने बैटरी को आर्मेनिया के लिए रवाना किया। भारत से निर्यात की जाने वाली यह दूसरी मिसाइल प्रणाली है।

पाकिस्तान को क्यों टेंशन

भारत से मिले इस हवाई सुरक्षा कवच का इस्तेमाल आर्मेनिया अपने पड़ोसी शत्रु देश अजरबैजान के साथ लड़ाई में कर सकता है। आर्मीनिया और अजरबैज़ान के बीच नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को लेकर पुराना विवाद है और दोनों देश इस मुद्दे पर अकसर सीमा पर लड़ते रहते हैं। अजरबैजान को इस लड़ाई में लगातार पाकिस्तान से हथियार मिलते रहे हैं, जिनका इस्तेमाल वह आर्मेनिया के खिलाफ करता रहा है लेकिन आकाश एयर डिफेंस सिस्टम मिल जाने से आर्मेनिया की ताकत अब बढ़ जाएगी और वह पाकिस्तानी हथियारों को पलभर में ध्वस्त कर सकता है। पाकिस्तान को यही चिंता सताने लगी है कि अगर आर्मेनिया ने उसके हथियारों को ध्वस्त कर दिया तो उसके हथियारों का बाजार खत्म हो जाएगा और दुनिया में किरकिरी होगी, जो अलग से।

कितना ताकतवर है आकाश मिसाइल सिस्टम

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित आकाश मिसाइल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जो 25 किलोमीटर की सीमा के भीतर लड़ाकू जेट, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है। आकाश डिफेंस सिस्टम की हरेक बैटरी 3डी पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार से सुसज्जित है, जो दुश्मनों की भनक लगाने में कारगर है। इसमें चार लांचर हैं, जिनमें से प्रत्येक में तीन इंटरलिंक्ड मिसाइलें लगी हैं।

यह सिस्टम गतिशील है। इसे पहिएदार और ट्रैक वाले दोनों तरह के वाहनों पर तैनात किया जा सकता है। बीईएल ने इसमें निगरानी रडार, मिसाइल गाइडेंस रडार और सी4आई सिस्टम सहित कई महत्वपूर्ण ग्राउंड सपोर्ट उपकरण से इसे ताकतवर बनाया है। इसमें ऐसे सिस्टम लगे हैं जो एक साथ कई विमानों और मिसाइलों को ट्रैक कर सकता हैं। यह अपने साथ हथियार भी लेकर जा सकता है । बीईएल ने कहा है कि यह कार्यक्रम रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। इससे पहले भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम फिलीपींस को निर्यात किया था।

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