
राजधानी दिल्ली में चल रहे जी-20 समिट में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हिमाचल में हुई त्रासदी को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग की है।
उन्होंने प्रदेश को पटरी पर लाने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज देने का भी आग्रह किया है।
सीएम सुक्खू ने शनिवार को नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर आयोजित रात्रि भोज में भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से भी मुलाकात की और उनके समक्ष प्रदेश हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
सीएम सुक्खू ने प्रधानमंत्री को प्रदेश में भारी बारिश के कारण आई आपदा से हुए नुकसान के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी और उनसे प्रदेश में हुई त्रासदी को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि गत दो महीनों में भारी बारिश, भू-स्खलन और बाढ़ के कारण प्रदेश में 400 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है और 13 हजार से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है, जिस कारण हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण प्रदेश को 12 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कहा कि इस आपदा से उबरने के लिए प्रदेश को केंद्र की ओर से आर्थिक पैकेज की आवश्यकता है। आपदा के कारण प्रदेश में हुए अभूतपूर्व नुकसान के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि भुज और केदारनाथ में आई आपदा की तर्ज पर हिमाचल को भी विशेष राहत पैकेज दिया जाना चाहिए। नरेंद्र मोदी ने ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा उठाए गए प्रदेश हित के मद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि प्रदेश की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
पीएम मोदी और सीएम सुक्खू की मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फोटो में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी सुक्खू के कंधे पर हाथ रख कर बातचीत कर रहे हैं। बता दें कि सुक्खू ने पहले कहा था कि प्रदेश में बारिश संबंधित घटनाओं के कारण 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस महीने चार सितंबर को मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा था कि जरूरत पड़ने पर वह इसे लेकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इससे पहले, राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस ने 10 अगस्त तक 6,700 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया था और मानसून के दौरान हुए नुकसान की एक विस्तृत रिपोर्ट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को भेजी थी।