अखिलेश यादव ने लाल बिहारी को बनाया विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष, क्यों विस में फंसेगा शिवपाल का नाम

माजवादी पार्टी ने यूपी विधान परिषद में लाल बिहारी यादव का नेता प्रतिपक्ष बना दिया है। विधान परिषद में लाल बिहारी यादव पहले से सपा दल के नेता हैं। विधान परिषद में अभी तक सपा के पास नेता प्रतिपक्ष बनाने के लायक सदस्य संख्या नहीं थी।पिछले दिनों 13 पदों के चुनाव में सपा को तीन सीटें मिली थीं। इससे सपा के पास विधान परिषद में संख्या अब बढ़कर 10 हो गई है। यह नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए आवश्यक सदस्य संख्या के बराबर हो गई है। लाल बिहारी के विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनने से विधानसभा में शिवपाल यादव के नेता प्रतिपक्ष बनने की उम्मीदें अब कम हो गई हैं।

फिलहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए कोई नाम फाइनल नहीं हो सका है। लाल बिहारी यादव के विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष बनने से शिवपाल के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनना अब मुश्किल लग रहा है। अखिलेश दोनों सदनों में यादव को नेता प्रतिपक्ष बनाने पर घिर सकती है। ऐसे में यहां विधायक रामअचल राजभर और इंद्रजीत सरोज का नाम आगे चल रहा है। सपा पीडीए को मुख्य मुद्दा बनाकर उपचुनाव और आने वाले विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान पहले ही कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि गैर यादव किसी पिछड़े या दलित को ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाएगा।

लाल बिहारी यादव को विधान परिषद में में नेता प्रतिपक्ष बनाने के साथ ही किरन पाल कश्यप को मुख्य सचेतक बनाया गया है। इसके अलावा आशुतोष सिन्हा को सचेतक और जासमीर अंसारी को उपनेता बनाया गया है। चारों पदों पर मनोनयन भी साफ इशारा कर रही है कि सपा ने लोकसभा चुनाव में मिली जीत को ही विधानसभा चुनाव के लिए अपनी मुख्य रणनीति बना ली है।

अभी तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव जीतने के बाद यहां से इस्तीफा दे दिया है। कुछ विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री व अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव को नेता प्रतिपक्ष बनाने की पैरवी कर रहे हैं। इसके उलट सपा गैर यादव पर ही दांव लगाने का मूड बना चुकी है। यही कारण है कि रामअचल राजभर और इंद्रजीत सरोज का नाम सबसे आगे हैं। योगी सरकार ने 29 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र बुलाया है। ऐसे में माना जा रहा है कि एक दो दिन में विधानसभा के लिए भी सपा नेता प्रतिपक्ष का नाम फाइनल कर देगी।

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