
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में इस समय प्रचंड गर्मी पड़ रही है। देश के कई शहरों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया जा रहा है।लोग गर्मी के प्रकोप से परेशान और बीमार पड़ रहे हैं और लगातार कई जगहों पर हीटवेव का रेड अलर्ट जारी किया जा रहा है। कई शहरों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और तापमान 50 डिग्री के पार भी पहुंच गया है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय नौतपा चल रहा है और आज ( 30 मई 2024) नौतपा का छठा दिन है।नौतपा की शुरुआत 25 मई 2024 से हुई थी, जो 2 जून 2024 तक रहेगा। माना जाता है कि नौतपा जब से आरंभ होता है, उस दिन से लेकर आने वाले 9 दिनों तक धरती पर भीषण गर्मी होती है। शास्त्रों के अनुसार, जब ज्येष्ठ मास में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब-तब गर्मी बढ़ती है। रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का नक्षत्र है और सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर चंद्रमा की शीतला कम हो जाती है। इसलिए 9 दिनों तक भीषण गर्मी होती है।इस अवधि में सूर्यदेव धरती के और करीब आ जाते हैं यानी इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। यही नहीं इस माह लू भी चलती है, जो लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। नौतपा के समय धरती पर आसमान से आग बरसाने के समान गर्मी रहती है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सूर्यदेव को जल चढ़ाना चाहिए, इससे उनके प्रभाव में कमी आ सकती है और गर्मी से राहत मिल सकती है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं नौपता और भीषण गर्मी का ज्योतिषीय और धार्मिक कनेक्शन क्या है।
कब शांत होंगे सूर्यदेव
ज्येष्ठ माह भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है। इस माह में लू चलने के साथ-साथ आसमान से आग बरसती है। इस दौरान नौतपा होने से धरती पर सूर्य की किरणों का प्रभाव सीधा होता है, जो तापमान को बढ़ाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 2 जून 2024 को नौतपा समाप्त हो जाएगा। ऐसे में सूर्यदेव के प्रकोप से राहत मिल सकती है और गर्मी के स्तर में कुछ कमी आने की संभावना बढ़ जाती है।
गर्मी को लेकर विष्णु पुराण में जिक्र
धरती पर गर्मी का तापमान बढ़ने के पीछे वैज्ञानिक कारण माना जाता है। हालांकि, धार्मिक दृष्टि से भी इसका मुख्य कारण पता चलता है। विष्णु पुराण में बताया गया है कि जैसे जैसे यह समय कलयुग के अंत की ओर बढ़ेगा वैसे वैसे सृष्टि प्रलय की ओर बढ़ेगी। माना जाता है कि जल प्रलय से पहले ये गर्मी सृष्टि को विनाश की ओर ले जाएगी। वहीं विष्णु जी सूर्य की संतरंगी किरणों में समा जाएंगे, जिससे गर्मी का स्तर अधिक बढ़ जाएगा। लोग बरसात की बूंदों के लिए तरस जाएंगे और खेती भी नष्ट हो जाएगी। यही नहीं नदी और तालाब व जलाशय सबकुछ सूख जाएंगे। इसलिए विष्णु पुराण की बातों को ध्यान में रखते हुए जल की बर्बादी करने से बचना चाहिए।
नौतपा में करें यह खास कार्य
नौतपा भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है। लेकिन इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। साथ ही सूर्य देव की कृपा जातक के ऊपर बनी रहती है। माना जाता है नौतपा के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इससे घर के लोग स्वस्थ रहते हैं। साथ ही सुबह स्नान कर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ये सेहत से जुड़ी परेशानियां दूर करता है। नौतपा के समय सूर्यदेव का भारी प्रकोप देखने को मिलता है, ऐसे में जरूरतमंदों को गर्मी से बचाव के लिए पानी, पंखा व खानपान की चीजों का दान करना चाहिए। इससे सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं।
नौतपा में सूर्यदेव की पूजा
नौतपा के समय रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। फिर पवित्र जल से सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल चढ़ाए। इस जल में फूल, अक्षत, गुड़, रोली इत्यादि चीजें मिला लें। नौतपा के समय सूर्य देव को जल चढ़ाने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय माना गया है। इस दौरान सूर्य मंत्र मंत्र का जाप जरूर करें।