अखिलेश यादव पूर्वांचल में PDA से चक्रव्‍यूह भेदने में जुटे, छठे चरण में 9 OBC उम्‍मीदवार उतारे; समझें रणनी‍ति

 समाजवादी पार्टी ने पूर्वांचल की चुनावी बाजी अपने हक में करने के लिए कई नुस्खे आजमाए हैं। ज्यादातर सीटों पर गैरयादव ओबीसी प्रत्याशी उतारे हैं। मजबूत प्रत्याशियों की तलाश दलबदल करा कर पूरी की गई है।

ध्रुवीकरण रोकने को केवल एक मुस्लिम प्रत्याशी दिया। साथ ही उसे कांग्रेस के साथ दोस्ती का कुछ लाभ मिलने की उम्मीद है। इस तरह बिछाई गई चुनावी बिसात पर अब अखिलेश भाजपा से तमाम सीटें छीनने की कोशिश में हैं।

भाजपा ही नहीं बसपा के गढ़ों में सेंधमारी की तैयारी है। अब अखिलेश यादव के रणनीतिक कौशल का इम्तहान होने वाला है। कई बार टिकट बदल कर अब उन्होंने इलाके के अनुकूल जातीय समीकरण बिठाएं हैं। उसके भरोसे वह बड़ा मैदान जीतने की कोशिश में हैं। भारतीय जनता पार्टी व बहुजन समाज पार्टी से मुकाबले के लिए पीडीए (पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक) समीकरण पर भरोसा है तो कहीं पुराने एमवाई फार्मूले का इस्तेमाल आजमगढ़ जैसी सीटों पर हो रहा है।

पूर्वांचल के रण में 19 सीट में 13 पर ओबीसी
सपा ने पांचवें चरण की सीटों के लिए दलित ओबीसी के साथ सवर्णों के साथ जातीय समीकरण बिछाए हैं तो छठे चरण में सर्वाधिक नौ सीटों पर ओबीसी प्रत्याशी उतार कर भाजपा को चुनौती पेश की है। आखिरी दौर के चुनाव में सपा का एक मुस्लिम प्रत्याशी है तो तीन सवर्णों पर भी दांव लगाया गया है। केवल छठवें व सातवें चरण में जहां पूर्वांचल की 27 सीटें हैं। इनमें में सपा 21 पर, कांग्रेस पांच पर व सहयोगी टीएमसी एक सीट पर लड़ रही है। सपा ने इन 21 सीट में सर्वाधिक 13 ओबीसी प्रत्याशी उतार दिए हैं।

भाजपा का चक्रव्यूह तोड़ने की कोशिश में
सपा ने इस बार सलेमपुर, फतेहपुर, इलाहाबाद , कुशीनगर , देवरिया महाराजगंज, बस्ती, सुल्तानपुर चंदौली मछलीशहर बलिया भदोही सीट पर खास निगाह लगा रखी है। वहीं बसपा के गढ़ माने जाने वाली अम्बेडकर नगर, श्रावस्ती, लालगंज, घोसी, जौनपुर व गाजीपुर सीट पर खास दांव लगाया है। सपा ने इन सभी सीटों पीडीए समीकरण खास तौर पर इस्तेमाल किया है। गाजीपुर व श्रावस्ती में बसपा से जीते अफजाल अंसारी व रामशिरोमणि वर्मा अब सपा के योद्धा के रूप में मैदान में हैं।

मुख्तार अंसारी के निधन के बाद इलाके में उपजी सहानुभूति का लाभ सपा गाजीपुर व घोसी में उठाने की कोशिश हैं। यहां अल्पसंख्यक वोटरों का एकमुश्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। बसपा की जीती इन सीटों पर ज्यादातर में पुराने बसपाईयों को ही सपा ने उम्मीदवार बना कर मैदान में उतारा है। सपा राजभर वोटों के लिए खास सक्रिय है।

पाला बदलने वालों पर लगाया अखिलेश ने दांव
सपा अपने पूर्व घोषित प्रत्याशियों हटाकर पाला बदलने वाले, लेकिन कद्दावर नेताओं को टिकट थमा दिया। भाजपा के भदोही से सांसद रमेश बिंद को मिर्जापुर से उतार कर अखिलेश ने विरोधियों को चौंका दिया। इसके लिए अपने पहले के प्रत्याशी का टिकट काटना पड़ा। श्रावस्ती में राम शिरोमणि वर्मा हो या गाजीपुर में अफजाल अंसारी। यह दोनो भी सांसद हैं और पिछली बार बसपा से जीते थे।

पांचवां चरण छटवां चरण सातवां चरण

प्रत्याशी 10 12 9

दलित 4 2 1
ओबीसी 4 9 4
मुस्लिम 0 0 1
सवर्ण 2 1 3

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